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जानें वालों के लिए खुले है टीपू के दरवाजे

कभी सूबे की सत्ता में काबिज रहे अखिलेश यादव को अपना बुरा वक्त याद आने लगा है। इससे यह पता चलता है कि नेताओं के अच्छे दिन सत्ता में बने रहने से होते हैं।
बड़ी दर्दीली आवाज से अखिलेश यादव ने कहा कि जिन्हे जाना है वो जा सकते हैं, ताकि उन्हे भी पता लगे कि बुरे वक्त का साथी कौन है ?

हमारे समाज व संस्कृति में प्राचीन समय से ही साथ और साथी की बड़ी महत्ता रही। अच्छे दिनों में साथ और साथी की सचमुच कमी नहीं होती है। जैसे ही बुरा वक्त आता वैसे ही साथियों की भीड़ छटने लगती है।

समाजवादी पार्टी के साथ यही हो रहा है। ये दर्द सिर्फ टीपू का नहीं बल्कि हाल ही में सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के चित्रकूट जिलाध्यक्ष अनुज यादव ने लिखा था कि आजकल सपा के वो प्राथमिक सदस्य नहीं दिख रहे। जो स्वयं को सत्ता के समय सपाई घोषित करते थे। ये सच है कि जब कोई पार्टी सत्ता में होती है, तो कुछ लोग ढपोर शंख की भांति स्वयं को उस पार्टी का सदस्य बढ़चढकर घोषणा कर घोषित करते हैं।

पुराने से पुराना जिन्न भी बाहर निकल आता है। आज गौर से देख लें तमाम घरों में भूतपूर्व लिखा हुआ भाजपाई पदाधिकारी नजर आता है। मानसिकता सिर्फ इतनी सी है कि तिनका मात्र लाभ भी हो जाए तो आंगन भर जायेगा।

वहीं सपा से तीन ताकतवर एमएलसी भाजपा के घर को रफू चक्कर हो चुके हैं। बुक्कल नवाब जैसे मुस्लिम नेता का भाजपा में सम्मिलित होना आम भाजपाई को पचता नहीं लेकिन शीर्ष नेतृत्व को पच ही जाता है।

कुल मिलाकर भाजपा 2019 की तैयारी पर डटी हुई है तो वहीं विपक्षी खेमे में चूहों की भांति भगदड़ मची हुई है। विपक्ष अपने घर की चारदीवारी मजबूत नहीं रख पा रहा है।
अखिलेश यादव पूरे दमखम के साथ डटे हुए हैं परंतु सपाइयों की भाभी आजकल नजर नहीं आ रही हैं। अब टीपू अकेले ही पूरे कुनबे को संभालने में दमखम लगा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यूपी सरकार पर जमकर कटाक्ष भी किए।

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