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दुजाना की मौत के बाद फारूख अब्दुल्ला के बदले सुर, कहे कि सुरक्षा बलों की कार्यवाही से कश्मीर में शांति स्थापित होगी

मौसम में तापमान कम ज्यादा होता रहता है। किन्तु भारत का तापमान आजादी के समय से ऐसा तय कर दिया गया कि कश्मीर का तापमान हमेशा से हाई रहा है। कश्मीर समस्या देश की मुख्यधारा की समस्या है।

प्रथम बार गैर कांग्रेसी पूर्ण बहुमत की केन्द्र सरकार के इस कार्यकाल में चीन पाकिस्तान और कश्मीर के हालात बयां कर रहे हैं कि कहीं कुछ तो खिचड़ी पक रही है। जो खिचड़ी अब तक बीरबल की खिचड़ी बनी थी, वो अब मोदी खिचड़ी बन चुकी है। जिसमें अजीत डोभाल सरीखे रणनीतिकार की मुख्य भूमिका है, तो सेना के बंधे हाथ भी खुल चुके हैं। कश्मीर में अब आतंकियों से किसी प्रकार का समझौता नहीं हो रहा है। बल्कि सीधे सीधे मार गिराया जा रहा है।

फिर भी भारतीय सेना ने लाजवाब उदाहरण उन लोगों को पेश किया जो लोग मानवाधिकार की बात करके आतंकी दैत्यों की पैरोकारी करते हैं। सेना द्वारा एक आडियो जारी किया गया। जिसमें अबु दुजाना को मारने से पहले समर्पण करने की बात का जिक्र किया गया है। जब आतंकी ने साथियों सहित स्वयं के लिए मौत चुन ली तब सेना ने नागरिको को सुरक्षा प्रदान करते हुए। अबु दुजाना और उसके साथियों को ढेर कर दिया।

सेना की ऐसी पारदर्शी कार्रवाई से विपक्ष के पास भी जब कोई मुद्दा नहीं शेष रहा तब आखिरकार फारूख अब्दुल्ला के सुर भी बदल गए और सेना की सराहना करते हुए कहने लगे कि उन्हें उम्मीद है कि सुरक्षा बलों की ऐसी कार्रवाई से कश्मीर में शांति स्थापित होगी।



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