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अमरनाथ यात्रियों पर हमले का राहुल कनेक्शन

अमरनाथ यात्रा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शुरू हुई थी। देश भर के नागरिकों को सीमा पर तनाव के हालात पता हैं फिर भी धार्मिकता के आव भाव ऐसे हैं कि लोग हजारों किलोमीटर की खतरे से भरी यात्रा जान जोखिम में डालकर करते हैं।

अनंतनाग में यात्रियों से भरी एक बस पर आतंकियों ने गुरिल्ला वार किया। धर्म की यात्रा करने वाले निहत्थे नागरिकों पर आतंकी कहर बरपा कर ना मालूम क्या साबित करना चाहते हैं ? इससे धर्म को मानने वालों की आस्था पर तनिक भी घात नहीं पहुंचा बल्कि यात्रियों का जत्था पुनः रवाना हो चुका है। मनुष्य जब धार्मिक हो जाता है तब मौत से भय नहीं लगता है।

शायद आतंकियों का यही मंसूबा था कि अमरनाथ की यात्रा रोक दी जाए। जैसे कि चीन इस यात्रा के पक्ष में नहीं था। सीमा पर भारत की बढ़ती धाक से बौखलाया हुआ चीन निचले से निचले स्तर पर उतरता नजर आ रहा है। भूटान को संरक्षण देना भारत और भूटान के मैत्री संबंध पर निर्भर है और बाकयदा सशर्त भी है।

जिस प्रकार से वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थित बन रही है। प्रधानमंत्री मोदी के वैश्विक उभार से पगलाया ड्रैगन छद्म युद्ध और धमकी सड़ाकी की हरकत करने पर आमादा हो चुका है।

इस बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष सांसद राहुल गांधी की चीनी राजदूत से मुलाकात की चर्चा समूचे देश भर में गरम है। पहले इस मुलाकात को कांग्रेस के द्वारा छिपाया गया। जब चीन ने आधिकारिक जानकारी साझा कर दी तब कांग्रेसी युवराज बकायदा ट्विट से जानकारी देते हैं कि हाँ वह मिले थे। इसे एक औपचारिक मुलाकात करार दिया जाता है।

प्रश्न चिन्ह ये खडा होता है कि अगर औपचारिक मुलाकात थी, तो कांग्रेस ने इस मुलाकात को पहले छिपाया ही क्यूं ? संवैधानिक आधार पर भी सांसद राहुल गांधी के इस प्रकार की मुलाकात का कोई औचित्य नही होता है।

सोशल मीडिया में भी खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। पिछले वर्ष दिसंबर के महीने में मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान में मोदी को हटाने में मदद की अपील करते हुए नजर आए थे। इसके बाद भारत को सीमा पर अधिक तनाव और देश के अंदर आतंकी हमलों से निपटना पड़ा था। इसलिये सोशल मीडिया पर लोग राहुल गांधी की इस मुलाकात के बाद अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले की बात को लेकर खासा तूल दे रहे हैं।

कांग्रेस के लिए चिंतन का वक्त है कि उनका हाथ चीन और पाकिस्तान का हाथ जन जन को प्रतीत हो रहा है। समय रहते अगर मणिशंकर अय्यर पर कार्यवाही हुई होती तो इस प्रकार का अंदेशा देश की जनता को नही रहता।

अभी बहरहाल तो सोशल मीडिया में ये मामला खासा गरम है। राहुल गांधी की यह गोपनीय औपचारिक मुलाकात के तार अमरनाथ यात्रियों पर हमले से जोडे जा रहे हैं। जो स्वयं राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य के गले की फांस बन रहे हैं।

देश की जनता का मिजाज कांग्रेस और उनके नीति नीतिज्ञों को समझ लेना चाहिए। तब 44 के पार पहुंचने को सोच सकते हैं। इन हालात में 44 के अंदर की बाय समझ में आती है परंतु बढत बनाने व बनने के आसार बहुत कम प्रतीत होते हैं।

सर्वप्रथम राहुल गांधी का कर्तव्य बनता है कि वो शीघ्र ही इस मुलाकात का पूर्ण विवरण उपलब्ध करायें वरना मिणशंकर अय्यर के बयान के आधार पर राहुल सहित सम्पूर्ण कांग्रेस को जनता शक खी निगाह से देखने लगी है।

जानते भी हैं कि शक की बिमारी कितनी बुरी होती है। कांग्रेस के लिए जनता के मन में उसके प्रति ऐसी बीमारी बहुत घातक सिद्ध होगी। समय रहते ही कांग्रेस के वरिष्ठ जन अपनी नीतियां स्पष्ट कर लें वरना ऐसी आतंकी घटना के तार अगर इस तरह से जुड़ते रहे तो कांग्रेस मुक्त भारत बिना किसी आह्वान के बन जायेगा।

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