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ग्राम पंचायत कार्यालयों की हालत बदतर

जिले में ग्राम पंचायत की हालत बदतर बनी हुई है सरकार द्वारा ग्रामीण विकास का जिम्मा ग्राम पंचायतो को सौंपा है जिनके माध्यम से ग्रातिण क्षेत्र का विकास किया जाए तथा सभी योजनाए ग्राम पंचायत के माध्यम से संचालित होती है देश की अस्सी प्रतिशत आवादी ग्रामीण क्षेत्र में ही निवास करती है इस लिए सरकार ने ग्रामिण विकास मंत्रालय के माध्यम से त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था कायम किये है जिसमंे जिला पंचायत, जनपद पतंयात तथा ग्राम पंचायत को ग्रामीण विकास की जिम्मेदार सौपी हैं।

लेकिन वर्तमान समय मे देश की ग्रामीण विकास की हालत बदतर बनी हुई है जहां एक ओर ग्राम पंचायते अपनी कार्य के प्रति उदाशीन बनी हुई है वही दूसरी ओर सरकरो द्वारा भी ग्राम पंचायतो के प्रतिनिधीयो को अधिकार दिलाने में उनके अधिकार सीमित किये है तथा शासकीय तंत्र को हावी किया है।

लेकिन ऐसा नही है ग्रामीण विकास के लिए आने वाला बजट ग्राम पंचायत के माध्यम से ही खर्च हो रहा है लेकिन ग्रामीण पंचायतो के जनप्रतिनिधी तथा अधिकारी, कर्मचारी योजनाओं में ग्रामीण क्षेत्र के विकास में रूची न लेते हुए व्यक्तिगत फायदा तथा भृष्टाचार में योजनाओ को तब्दील करने मे अधिक सक्रिय रहते है उनके द्वारा फर्जी बिल बाऊचर लगाकर बजट को ठिकाने लगाने में कोई गुरेज नही किया जाता है पंचायत एवं ग्रामिण विकास के अन्तर्गत अनेक महत्वपूर्ण योजनाए संचालित है जिसमे मनरेगा योजना, पंच परमेश्वर, वित्त, सांसद निधि, विधायक निधि, जनभागीदारी से भी पंचायतो को फंड उपलब्ध होता है।

लेकिन इनका असर नही दिखता शासन के नियमनुसार प्रत्येक माह ग्राम पंचायतो की बैठक होना चाहिए तथा ग्राम सभा के माध्यम से पारित प्रस्ताव के अनुसार ग्राम पंचायत क्षेत्र का विकास किया जाना चाहिए लेकिन हकीकत तौर पर वर्षो ग्राम पंचायतो की बैठके नही होती महीनो पंचायतो के ताले नही खुलते जबकी शासन के नियमानुसार ग्राम पंचायत कार्यालयो को शासन के सभी कार्यालयो की तरह सुबह 10 बजे से शांयकाल 5 बजे तक खुलने का नियम है लेकिन जिले में शायद ही कोई ग्राम पंचायत कार्यालय हो जो शासन के नियमनुसार खुलती है क्षेत्रो का भ्रमण करने पर यह नजारा ही देखने को मिलता है की पंचायतो में ताले लटके रहते है तथा सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक को ग्राम के लोग ढूडते रहते है पंचायत कार्यालय के लिए चौकीदार नियुक्त किया जाता है तथा उसका भुगतान भी पंचायत द्वारा नियमित रूप से दिये जाने के बिल बाऊचर लगाये जाते है लेकिन वास्तविक रूप से पंचायतो मे कभी भी चौकीदार की उपस्थिती नही देखी जाती इसी प्रकार 14 वे वित्त पंचपरमेश्वर आदि की लाखो रूपये की राशि ग्राम पंचायत के अन्य कार्यो में खर्च दर्शाइ जाती है लेकिन वास्तविक रूप से उक्त कार्य नही किये जाते है इसी प्रकार मनरेगया योजना में फर्जी बिल बाउचर अवैध वेन्डरो के लगाकर शासन के राशि में भारी फर्जीवाडा किया जाता है। यदि वास्तविक रूप से जिले की ग्राम पंचायतो का आडिट भौतिक सत्यापन करा कर किया जाए तो बहुत बडा फर्जीवाडा उजागर हो सकता है।



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