कचरे का ढेर बने हुए जिले के साफ सुथरे होने के अच्छे दि"/>

डीएम महेंद्र बहादुर की कार्यशैली से बाँदावासी खुश

कचरे का ढेर बने हुए जिले के साफ सुथरे होने के अच्छे दिन का आगाज होने लगा है। नवागंतुक जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर की कार्यशैली से महसूस हो रहा है कि बांदा के दिन बहुरने वाले हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान का कुछ विशेष असर होता नही दिख रहा था। सूरज के ढलते ही रात के अंधेरे में तमाम व्यापारी सड़क को डस्टबिन समझकर कचरे का ढेर लगा देते थे, तो वहीं प्रशासन धृतराष्ट्र की भूमिका में नजर आता था।

नगरपालिका से कुछ प्रयास अवश्य किए जाते थे। लेकिन वो प्रयास नाकाफी साबित होते थे। विकास की रेल में तेजगति से बढते हुए शहर में प्रदूषण भी इतनी जोर से बढ रहा है कि भगवान ही मालिक हैं।

नवागंतुक डीएम महेंद्र बहादुर की पहल से नदारद रहने वाले सफाई कर्मी भी नजर आने लगे हैं। जिलाधिकारी ने साफ स्वच्छ शहर के लिए स्पष्ट आदेश दिए हैं। बकायदा एक टीम बनाकर निश्चित जगह पर साफ सफाई के निर्देश से लक्ष्य के मुताबिक स्वच्छता की पहल असरदार हो रही है।

अक्सर सवाल होता है कि जिलाधिकारी कैसा होना चाहिए ? इस सवाल का जवाब भी नवागंतुक डीएम की कार्यशैली दे रही है। जिनके कदम रखते ही शहर में बदलाव साफ नजर आने लगा है। ये युवा जोश और युवा सोच का परिणाम भी महसूस हो रहा है। केन्द्र एवं राज्य सरकार की जैसी सोच है। उस सोच के मुताबिक जिलाधिकारी अगर काम करने लगें तो यकीनन अंधेरा छटने लगता है।

बांदा नगरी में भी अंधेरा छटने लगा है, यहाँ अब प्रशासन को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनता की आवाज प्राथमिक है। आम जनता की छोटी सी परेशानी प्राथमिकता से सुनी जाए और समस्या का समाधान शीघ्र किया जाए। ये सच है कि प्रशासन अच्छा हो जाए तो जनता को राहत महसूस होती है।

जिला मुख्यालय बांदा में जिलाधिकारी की कार्यशैली से बहुत कुछ बदलता नजर आ रहा है। इसमें अन्य प्रशासनिक अफसर भी सहयोग कर देगें तो बिगड़ी हुई स्थितियां काबू में आ जायेगीं, वैसे भी जिलाधिकारी के चाबुक से चतुर्दिक स्वच्छता दिखने के बड़े आसार नजर आने लगे हैं।



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