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गढ्ढ़ों का पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण

‘पानी’ जिसके बिना जीवन संभव ही नही, पानी हर जीव के जीवन के लिये जरूरी है। लेकिन जब पानी नही होगा तो क्या होगा ? एक तरफ जहां केन्द्र सरकार व राज्य सरकार प्रतिदिन अपनी नई-नई योजनाओं के बारे में चुनावी रैलीयों मे बता रहे। लेकिन आज भी कुछ गाँव ऐसे है जहां न ही केन्द्र सरकार की और न ही राज्य सरकार की किसी भी योजनाओं का लाभ लोगो तक नहीं पहुच रहा है। आज भी कई ऐसे गाँव है जहां लोग अपनी मूल-भूत सुविधा खाना, पानी तक के लिये परेशान है। न ही उन्हें दो वक्त की रोटी नसीब हो रही है और न ही पीने के लिये पानी।

ऐसा की एक मामला चित्रकूट जनपद के रामनगर विकास खण्ड के अन्तर्गत ग्राम इटवा का सामने आया है। इटवा गाँव मे लोगो को सबसे बड़ी परेशानी ये है कि उनके पीने के लिये पानी की कोई व्यवस्था नही है। इस गाँव में एक सैकडा लोग निवास करते है जिनके बीच में सिर्फ एक हैण्डपम्प सरकार द्वारा लगवाया गया है। वर्तमान में वो हैण्डपम्प की खराब है जिसकी मरम्मत करने कोई नही आता है। ऐसे गाँव के जो परिवार धन सम्पन्न है वे तो अपने पैसे से अपने लिये पानी की व्यवस्था कर लेते है। लेकिन गरीब परिवार के लोगों को प्यासा ही रहना पड़ता है। और अगर प्यास बुझानी है तो लोग तालाबों, नदियों व गढ्ढ़ों को पानी पीने को मजबूर है। इन्ही गढ्ढ़ो का पानी व पीते है और दैनिक उपयोग में लेते साथ ही जानवरों के लिये भी इसी पानी का प्रयोग करते है।

आपको बताते चले ग्राम पंचायत इटवा के भैरम बाबा पुरवा में पेयजल का संकट अभी से मंडराने लगा यहां लोगों को अपने जीवन यापन के लिये गढ्ढ़ों का पानी पीना पड़ता है। ऐसा लगता जैसे सरकार द्वरा चलायी गयी योजनाये सिर्फ कागज के पन्नों तक सिमट कर रह गयी है। उन गरीब मजदूरो की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता जो हर योजनाओ के लाभ से वंचित है। यहाँ पर कई गरीब परिवार है जो कई सालों से अपने टूटे-फूटे, जर्जर मिट्टी के बने मकानों में रहते है। जो मिट्टी के मकान कब गिर जाये ये उन्हें भी नही पता। सरकार द्वारा चलायी जा रही ग्रामीण आवास योजना का लाभ भी यहां के गरीब परिवारों को नही मिला। यहां के गरीब परिवारों से जब बुन्देलखण्ड न्यूज के संवाददाता ने बात कि तो ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिल रहा है। न ही उन्हें सरकार की तरफ से पक्के मकान मिले है और न ही घर को चलने के किये किसी भी प्रकार की कोई पेशन योजना का लाभ है।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान व विकास खण्ड अधिकारी से अपनी समस्याओं के बारे में बताया। लेकिन कोई कुछ जबाव ही नही देता और न ही कोई पानी की समस्या का समाधान करता है।

शासन/प्रशासन का ध्यान इन बेबस मजदूरो की ओर क्यों नहीं जाता जो हर लाभ से वंचित है। क्या इन मजदूर परिवार के बच्चों के भविष्य में सिर्फ मजदूरी करना है। जिन हाथो में किताब होनी चाहिए उन हाथो मे ईट और फावड़ा नजर आता है क्या यहीं है अखण्ड भारत के भविष्य, आखिर कब तक मूलभूत समस्याओ से जूझता रहेगा मजदूर। गहराती हुई पेयजल संकट आवास, बिजली, तथा तमाम मिलने वाली मौलिक सुविधाओ के लिऐ  कब तक संघर्ष करेगा।