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भ्र्ष्टाचारी बीजानगर प्रधान बोले हूँ भाजपा का नेता, नहीं कर पाओगे कुछ

कबरई ब्लॉक के बीजानगर ग्राम के प्रधान के बारे में सुनेंगे तो हैरान रह जाएंगे, हैरान होना लाजमी भी है क्योंकि बीते 2 वर्ष में प्रधान बन गए हैं अविढ़ कब्जे करवाने के ठेकेदार। सवाल पूँछे जाने पर बताते हैं कि मैं अब सपा से भाजपा में आ गया हूँ तो अब मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा।

आपको बता दें हम गाँव मे हो रहे विकास की जब पड़ताल करने के लिए पहुँचे तो गाँव मे प्रवेश करते ही हमें गन्दगी के दर्शन हुए, चारों ओर कचड़ा, कीड़ों से बजबजाती हुई नालियां ये दिखा रही थीं कि स्वच्छ भारत की उम्मीद कितना पूरी हो रही है।

जब हमने गाँव मे जाकर पड़ताल की तो पता चला कि सरकारी आवास में है बहुत बड़ा घोटाला, ग्राम प्रधान द्वारा 20 से 30000 रुपये लिए गए और फिर उन्हीं को दिलाया गया योजना का लाभ, वास्तविक गरीब अभी भी सर ढांकने के लिए छत की आस लगाए बैठे हैं लेकिन प्रधान का पेट इतने में भी जब नहीं भरता तो गाँव के ही दबंगों द्वारा अवैध कब्जे करवाने पर उतारू है जिसका शिकार हो रहा है सरकारी विद्यालय। कब्जा करने वाला व्यक्ति एक वकील है जिसने बिना किसी पट्टे के सरकारी जमीन पर कब्जा जमाया हुआ है और प्रधान का भी हाथ उस पर रखा हुआ है जिसकी वजह है वकील द्वारा प्रधान को दी जाने वाली मोटी मलाई।
1 साल से ढेरों मकान अधूरे पड़े हुए हैं और प्रधान जी कर रहे हैं घोटाले पर घोटाले और जाँच करने पर पता चला कि पैसा निकल गया है और खर्च भी हो गया है लेकिन सरकारी आवासों का निर्माण ही नहीं हुआ।
वहीं वर्तमान प्रधान और पूर्व प्रधान की सांठगांठ के चलते पहले से मकान होने पर भी पूर्व प्रधान को सरकारी आवास योजना का लाभ मिल गया है।
वहीं गाँव के ही एक परिवार की दुर्दशा ये है कि बीते वर्ष उनका कच्चा मकान गिर गया और कोई भी मदद नहीं दी गयी लेकिन जब परिवार शरणार्थी बनकर पंचायत भवन में रुक गया तो प्रधान द्वारा उसके परिवार से मारपीट की गई व उन्हें उधर से निकाल दिया गया।

पैसे की भूख तो कुछ भी करवा लेती है वही किया गया प्रधान के द्वारा जिन व्यक्तियों के निजी आवास  बने हुए हैं उनको सरकारी आवास योजना का लाभ दिया गया है और 20 हज़ार से 30 हज़ार रुपये प्रति आवास प्रधान द्वारा लिया गया है और असल मे सुविधा के हकदार को तो कोई सुविधा ही नहीं प्राप्त हुई।

विद्यालय के पीछे पड़ी ग्राम समाज की ज़मीन पर भी घोटाले का रंग चढ़ गया और प्रधान जी ने अपनी भूख पूरी करने के लिए वो ज़मीन भी बेच दी जिधर आज इमारत खड़ी हो चुकी हैं। ग्राम पंचायत की ज़मीन पर भी अवैध कब्जे यहाँ आम हैं।

जब हमने प्रधान से बात करने की कोशिश की तो प्रधान के पति से बात हुई और उन्होंने अपने आप को पूर्व में सपा का कद्दावर नेता बताया और कहा कि आपको जो करना है कीजिये अब हम भाजपा में आ गए हैं और आप हमारे कुछ नहीं कर पाएंगे, आपको हमारी पहुँच का अंदाज़ा ही नहीं है।

क्या किसी नेता का रिश्तेदार होना आपको घोटाले करने का सर्टिफिकेट दे देता है, प्रशासन इस पर क्या कार्यवाही करता है यह वाकई महत्वपूर्ण है।

*सत्यम चौरसिया के साथ अमृत शुक्ला की ग्राउंड रिपोर्ट*

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