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बुन्देलखण्ड में नक्सलियों की दस्तक का दस्यु कनेक्शन

बुन्देलखण्ड दशकों से सूखे और पलायन जैसी समस्यायों से जूझता रहा है जिसने यहाँ के मूलभूत ढांचे को बुरी तरह से बर्बाद कर दिया है। आजादी के 70 साल बाद आज भी यहाँ गाँवो में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इस क्षेत्र का जितना नुकसान डकैतों ने नही किया उससे ज्यादा नुकसान यहाँ के भू माफियाओं और बालू माफियाओं ने किया। यूँ कहें की दोनों का चोली दामन का साथ रहा तो गलत नही होगा। इतनी समस्याएं और चारो तरफ लूट, खौफ का माहौल होने के बावजूद इस क्षेत्र में कभी भी नक्सली मूवमेंट देखने को नही मिला। कुछ थोड़े बहुत नक्सली मूमेंट की सूचना दशकों पहले बरगढ़ और मानिकपुर क्षेत्र में सुनने में आई था लेकिन समय के साथ ये बातें भी धूमिल हो गई। पिछले कुछ महीनों से विश्वस्त सूत्रों के हवाले से कुछ दस्यु गिरोहों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जाने की खबर मिल रही है। अब इस खबर में कितनी सच्चाई है ये तो जाँच का विषय है लेकिन अगर इसमें एक प्रतिशत भी सच्चाई है तो ये काफी गंभीर मसला है। फिलहाल पुलिस प्रशासन का कहना है कि हमे ऐसा कोई इनपुट नही प्राप्त हुआ है ।

हाल ही में भारत सरकार के निर्देश पर परिस्थितिकरण अभ्यास को आई आरएएफ की टीम के सहायक कमांडर विजय प्रकाश ने बाँदा कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसर में कहा था कि बुन्देलखण्ड में नक्सलियों जैसा कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए इस तरह का अभ्यास अक्सर करते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड अन्य प्रदेशों के कुछ हिस्सों से ज्यादा विकसित है। यहां पर सीधे चैलेंज करके हमला करने वाले कम है। यहां जो भी है वह छुपे रहते है अचानक बड़ी वारदात का अंजाम देते है। अब तो कुछ बड़े डकैतों के सफाए के बाद बड़ी घटनाओं में अंकुश लगा है।

हमेशा दस्युओ का पसंदीदा गढ़ रहे चित्रकूट जिले के पाठा क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से दस्यु बबली कोल और दस्यु गोप्पा गैंग का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आम लोगो का जीना मुश्किल है। बहरहाल मौजूदा पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेन्द्र के नेतृत्व में पुलिस लगातार कार्यवाही करके इन गैंगों के मूल ढांचे को खत्म करने में लगी हुई है। बुन्देलखण्ड न्यूज के विशेष संवाददाता अनुज हनुमत से ख़ास बातचीत में जिले के तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेन्द्र ने बताया कि हमारी टीम लगातार सर्च ऑपरेशन में लगी हुई हैं और जल्द से जल्द हम इन गैंगों को खत्म करने में कामयाब हो सकेंगे। उन्होंने यहाँ के डकैतों के नक्सलियों से संपर्क की बात नकारते हुए कहा कि ये बात तो सही है कि सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस के डर से डकैत मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा में छिपने चले लेकिन अभी तक हमे किसी प्रकार की ऐसी सूचना या इनपुट नही मिला है कि इनका नक्सलियों से कोई संपर्क है। हम लगातार सभी पहलुओं पर नजर बनाए हुए हैं।

अगर हम पिछले दो दशक पहले बुन्देलखण्ड क्षेत्र की बात करें तो तब हालात आज से ज्यादा भयावह और खतरनाक थे लेकिन अगर कुछ सूचनाओं को छोड़ दिया जाये तो यहाँ कभी भी नक्सली मूमेंट का इनपुट नही मिला। लेकिन हम इस बात से इंकार नही कर सकते। चार दशक से भी ज्यादा लंबे समय तक खौफ का पर्याय रहे दस्यु ददुआ के समय में भी कभी नक्सली मूवमेंट के इनपुट नही मिले और न ही दस्यु ठोकिया के समय में लेकिन अगर उस समय की कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो उस समय भी नक्सली मूवमेंट के इनपुट पुलिस प्रशासन को प्राप्त हुए थे लेकिन उन्हें दबा दिया गया था। बहरहाल सच्चाई कुछ भी हो लेकिन इस बात से इंकार नही किया जा सकता है कि डकैतों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और अगर जल्दी ही इन पर लगाम नही लगाई गई तो आने वाले समय में नक्सली मूवमेंट की बात सच भी हो सकती है।

About the Reporter

  • अनुज हनुमत

    5 वर्ष , परास्नातक (पत्रकारिता एवं जन संचार)

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