?> एक ही समय में नील क्रांति व मनरेगा योजना से हुई तालाब की खुदाई बुन्देलखण्ड का No.1 न्यूज़ चैनल । बुन्देलखण्ड न्यूज़ विकास खण्ड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिदोखर पुरई में मई"/>

एक ही समय में नील क्रांति व मनरेगा योजना से हुई तालाब की खुदाई

विकास खण्ड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिदोखर पुरई में मई माह के प्रथम सप्ताह ममें खेरे बाबा ताालाब को दो योजनाओं से एक साथ खोद डाला गया और लगभग दो लाख रुपये ठिकाने लगा दिये गये। मामला प्रकाश में आने पर दोनो कार्यदायी संस्था तालाब खुदवाने का अपना-अपना दावा करने लगी है। किसने तालाब खोदा है किसने नही खोदा है इसका खुलासा तो जांच के बाद ही होगा। फिलहाल मामला चर्चा का विषय बन गया है।

ग्राम पंचायत बिदोखर पुरई में स्थिति खेरे बाबा तालाब की खुदाई के लिये मनरेगा योजना से चार लाख की स्वीकृत मिली है। ग्राम पंचायत का दावा है कि ग्राम पंचायत ने 8 मई तक इस तालाब को मजदूरी से खुदवाया है लगभग 30 हजार रुपये व्यय किये गये है लेकिन भुगतान अब तक नही हुआ है। वही नील क्रांति योजना से इस तालाब की खुदाई 10 मई तक कराई गयी है। इस योजना से 1.70 लाख की धनराशि व्यय कराई गयी है।

यह कार्य मशीनों से कराया गया है। इस तालाब को मछली पालन हेतु पट्टे पर देखा गया है। जुगराज धुरिया के नाम इसका पट्टा है। इसको मछली ठेकेदार मुनव्वर खान ने किराये पर ले रखा है। ठेकेदार ने इसको मछली प्रजन्न केन्द्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रखी है। ठेकेदार के अनुसार उसने ही नीलक्रांति योजना के तहत 1.70 लाख व्यय करके इसमें खुदाई का कार्य कराया है। अब लोगों को यह समझ में नही आ रहा है कि दो कार्यदायी संस्थाओं ने एक साथ कैसे इस तालाब को खोद डाला।

ग्राम प्रधान चन्द्रप्रकाश यादव ने बताया कि उन्होंने अप्रैल के अन्तिम दिनों में मनरेगा का कार्य शुरू कराकर 8 अप्रैल तक खुदाई कराई है इसके बाद तालाब को किसने खोदा है उन्हे पता नही है इनके अनुसार अभी तक मनरेगा के मजदूरों का भुगतान नही हुआ है भुगतान हेतु प्रपत्र एपीओ मनरेगा के पास लम्बित है। इस तरह से एक साथ दो संस्थाओं ने एक ही तालाब को लगभग एक ही अवधि में खोद कर धन का बंदर बाट करने में कोई कसर बाकी नही छोड़ी है। मामला प्रकाश में आने पर अब जांच कराने की बात होने लगी है। मनरेगा के कार्य की जांच एपीओ मनरेगा जीतेन्द्र कुमार को सौंपी गयी है।

गौरतलब है कि पिछले एक दशक में इस तालाब को विभिन्न योजनाओं से चार बार खोदा गया है। सबसे पहले इसको वित्तीय वर्ष 2005-06 में लघु सिंचाई विभाग ने लगभग 23 लाख रुपये व्यय करके खुदवाया था। इसके बाद इसकेा ग्राम पंचायत ने मनरेगा योजना के तहत अलग-अलग वर्षो में तीन बार खुदवाया है। इस तरह से पिछले 10 वर्षो से इसको चार बार खोदा गया है। इस वष्र इसको दो कार्यदायी संस्थाओं ने एक साथ खोद डाला है। इसके बाद भी तालाब की खुदाई पूर्ण नही हुई है। इससे यह साबित होता है कि बुन्देलखण्ड में तालाब खुदाई के नाम पर महज धन बर्बाद किया जा रहा है धरातल पर काम नदारत है।