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आ गया सीएम का प्रोटोकाल बढी अधिकारियों की धडकने

बांदा मण्डल के सभी चारों जिलों के विकास कार्यो व कानून व्यवस्था की समीक्षा करने के लिये शनिवार को मुख्यमंत्री के आगमन की आधिकारिक सूचना जिला प्रशासन को मिल गई है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री सवा दस बजे बांदा पहुंच मण्डल के सभी जनपदों के विकास कार्यो की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम को लेकर जिले के अधिकारी भारी दहशत में हैं। पेयजल, सिंचाई संसाधन व लोक निर्माण जैसे अहम विभागों के अधिकारी अपनी कमियां छिपा मुख्यमंत्री को सब ठीक ठाक दिखाने के लिये पसीना छोड रहे है।

गौरतलब है कि कई दिन से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बांदा आ मण्डल के चारों जिलों के विकास कार्यो की समीक्षा करने की चर्चा चल रही थी। इसको लेकर सभी जिलों के अधिकारी खाशे दहशत में थे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी उनके बांदा आगमन की आधिकारिक सूचना भी मंडल के सभी जिलाधिकारियों को प्राप्त हो गई है। मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम की अधिकृत सूचना आते ही विकास कार्यो से जुडे तमाम विभागों के अधिकारी पसीना छोड रहे है।

दरअसल बुन्देलखण्ड की सभी 19 विधान सभा सीटों में भाजपा का परचम लहराने के बाद प्रदेश सरकार ने यहां के विकास को अपनी प्राथमिताओं में लिया है। मुख्यमंत्री पहले भी कई बार बुन्देलखण्ड के विकास को वरीयता देने की बात कह चुके है। उनकी इस मंशा से वाकिफ अधिकारी दहशत में है कि विकास कार्यो की जमीनी हकीकत की जानकारी में दक्ष सीएम योगी पता नही किस विभाग की बखियां उधेडना शुरू कर दे।

फिलहाल यहां विकराल गर्मी के चलते मुख्यमंत्री का ध्यान पेयजल आपूर्ति पर जा सकता है। इन मामलों में सबकुछ ठीक ठाक दिखाने के लिये जल निगम व जल संस्थान के अधिकारी अपनी फेल हो चुकी योजनाओं पर सफलता का मुलम्बा चढा मुख्यमंत्री को सबकुछ ठीक दिखाने के प्रयास में है। जबकि हकीकत यह है कि जल निगम की जिले में संचालित 33 पाईप पेयजल योजनाओं में से आधे से ज्यादा सफेद हाथी साबित हो रही है।

पत्थर उद्योग नगरी कबरई और बसपा सरकार में श्रममंत्री रहे बादशाह सिंह के गुहनगर खरेला में पीने के पानी की मारामारी की हकीकत किसी से छिपी नही है। बेलाताल पुनरगठन पेयजल योजना के क्षेत्र में आने वाले आधा दर्जन से अधिक गांवों मे ंपानी की आपूर्ति सालों से ठप हैं। यही हाल श्रीनगर पाईप पेयजल योजना का है। जिले के सबसे बडे गांव पनवाडी मे ंभी जल संस्थान पूरी बस्ती को पानी दे पाने मे ंनाकाम है। मुख्यमंत्री ने गहराई से छानबीन की तो इन विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
 

जल संसाधन विकास व खेत तालाबांे पर होगी नजर

पूर्व सरकार में जल संसाधन विकास व खेत तालाब योजना के नाम पर करोडों का बजट ठिकाने लगाया गया। इन्ही योजनाओं में किसानों का जमकर शोषण भी किया गया है। विभागों के जिम्मेदार अधिकारी बात तो किसानों के बैंक खाते के जरिये भुगतान की करते है पर अपने कर्मचारियों के परिचित जेसीबी मालिको से मोटा कमीशन ले उन्हें थ्ज्ञोक मं तालाब खुदाई का काम दे खाशी कमाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने योजना की परते उधेडना शुय किया तो यह हकीकत छिपा पाना आसान नही होगा।
 

किसानों को बधी मुआवजा मिलने की आस

मुख्यमंत्री के आगमन से अर्जुन सहायक परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले सैकडों किसानों को मुआवजा मिलने की उम्मीद बढ गई है। 800 करोड की लगात की प्रस्तावित यह योजना मोटे कमीशन के बंदर बांट के चलते अब तक 2400 करोड रूप्या खर्च होने के बाद भी पूरा होने का नाम नही ले रही। हद तो यह कि तीन गुनी रकम खर्च होने के बाद भी डूब क्षेत्र में आये सभी किसानों की अधिगृहीत भूमि का मुआवजा भी नही दिया जा सका और न ही कबरई बांध के डूब क्षेत्र में आये झिर सहेवा गांव के लेागों के पुनरवास की कोई व्यवस्था की जा सकी है। प्रभावित ग्रामीण मुआवजे की मांग को लेकर लम्बे अर्से से लगातार आन्दोलन कर रहे है। बांदा मण्डल में सिचाई विभाग की यह सबसे महंगी व बडी सिंचाई परियोजना हैं ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि विकास कार्यो की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस योजना की प्रगति व गतिरोध की चर्चा जरूर करेंगे। जाहिर है ऐसा हुआ तो प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा न देने की बात भी सामने आयेगी। ऐसे में किसानों को सीएम के आने से लम्बे समय से लम्बित मुआवजा मिलने की उम्मीद बढ गई है।

 

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