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पल्र्स कंपनी से भुगतान दिलाने की मांग

पीएसीएल कम्पनी के वर्करों एवं ग्राहकों ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर भुगतान दिलाने व सुरक्षा की मांग की है। वर्करों का कहना है कि उन्होंने पीएसीएल (पल्र्स) कंपनी में अपनी बचत का एक-एक रुपया जोड़कर जमा किया। जो कि सेबी की कार्यवाही के चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बंद करा दी गयी है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश 2 फरवरी 2016 को हुआ था कि पल्र्स की प्रापर्टी की नीलामी कराकर सभी ग्राहकों का पैसा 6 माह के अंदर भुगतान वापस कराया जाये।

लेकिन इस आदेश डेढ़ साल बीतने के बावजूद भुगतान तो दूर इस मामले में अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। जिससे वर्करों की रोजी-रोटी तथा जान के लाले पड़े हैं। ग्राहकों की गाढ़ी कमाई फंसी होने के कारण ग्राहक पल्र्स कार्यकर्ताओं पर मारपीट व जानमाल में आमादा हैं। उनकी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित आरएम लोढ़ा कमेटी द्वारा भुगतान की शीघ्र घोषणा सार्वजनिक करायी जाये। पल्र्स में जमा सभी ग्राहकों को गाढ़ी कमाई वापस ले।

पल्र्स के ग्राहकों व वर्करों के भुगतान की तिथि व प्रक्रिया सार्वजनिक की जाये। पल्र्स की प्रापर्टी नीलामी कर भुगतान होने तक वर्करों की सुरक्षा की जाये। ज्ञापन में शिवशरण प्रजापति, अरविन्द कुमार, बृजेश सोनी, अमरनाथ, बाबू खां, रामसजीवन, विश्वम्भरनाथ, श्यामसुंदर, सुनील द्विवेदी, अवधेश कुमार, प्रहलाद प्रजापति, राजेन्द्र कुमार, रामनरेश, रामफल, गिरजाशंकर, प्रेमनाराण, प्यारेलाल, सोहनलाल, रामबाबू साहू, चन्द्रपाल, दयाराम, श्रीराम राठौर, सालिगराम, सुरेन्द्र बाबू, नवल किशोर, हरीकृष्ण, कमल तिवारी, अम्बिका प्रसाद, वीर सिंह यादव के हस्ताक्षर हैं।