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ग्रामीण क्षेत्र में झोलाछाप डाक्टरों की भरमार

जनपद की तहसील मडावरा क्षेत्र के ग्रामीण आंचलों में प्राईवेट डाक्टरों की भरमार है। गांव-गांव में झोलाछाप थैला लेकर पहुंच जाते हैं और मुहल्लों में बैठकर वहीं अपने तरीके से मरीजों का इलाज करना प्रारम्भ कर देते हैं। पिछले वर्षों में कई मरीजों की झोलाछाप डाक्टरों के इलाज से मौते भी हो चुकंीं हैं बावजूद इसके भी जिला प्रशासन झोलाछाप डाक्टरों पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है।

उल्लेखनीय है कि जनपद के पिछडे विकास खण्ड क्षेत्रों में आज भी मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। गांवों में आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर चिकित्सकों की तैनाती नहीं हैं और यदि कहीं पर है भी तो वे जाने को तैयार नहीं हैं। बडी-बडी अस्पतालें वर्षों पूर्व बनकर तैयार हो गये थे किन्तु हालात ही कुछ ऐसे रहे कि ये सरकारी अस्पताल कभी भी लम्बें समय तक के लिए चिकित्सकों से भरे नहीं रहे और यही नतीजा रहा कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं का ठीक से लाभ नहीं मिल सका।

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को ठीक से न मिलने के कारण गांवों में झोलाछाप डाक्टरांे ने अपना कारोबार खूब चमकाया। बोतल चढाने से लेकर दवा देने तक के खेल में कई की जान बची तो कई की जान भी चली गयी। दर असल कई वर्षों से मीडिया प्रशासन को अगाह करने का कार्य करता आया है किन्तु प्रशासन द्वारा झोलाछाप डाक्टरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में न लाये जाने के कारण इनकी तादाद घटने के बजाय बढती ही जा रही है। ऐसे में देखना होगा कि आखिरकार झोलाछाप डाक्टरांे के खिलाफ प्रशासन कार्यवाही अमल मंे कब ला रहा है।

 



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