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भारत में रैंसमवेयर साइबर अटैक का खौफ, कई ATM और बैंक में काम बंद

दुनियाभर में सनसनी बने रैंसमवेयर वायरस से भारत में खलबली मची है। इससे निपटने के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। हमले की आशंका को भांपते हुए भारत के कई एटीएम को एहतियातन बंद कर दिया गया है। ख़बर है कि बैंकों में ऑनलाइन लेनदेन भी प्रभावित हुआ है। हालांकि दोपहर बाद आरबीआई ने जारी एक बयान में कहा कि उनकी तरफ से एटीेएम नेटवर्क बंक करने संबंधी कोई निर्देश नहीं दिए हैं।

पिछले शुक्रवार को 99 देशों में हुए एक साथ साइबर हमले से टेक वर्ल्ड में दहशत का माहौल है। इस दौरान कई लोगों के सिस्टम अचानक बंद हो गए और कई फाइलें लॉक हो गईं थी। लोगों को डर है कि उनकी व्यक्तिगत जानकारियां अब थर्ड पार्टी के पास पहुंच चुकी है। आज सोमवार का दिन भी बेहद दबाव भरा रहा जब यह आशंका जताई जा रही थी कि खतरनाक वायरस दोबारा हमला कर सकता है और इस बार निशाना भारत सहित एशिया के कई देश थे। रविवार को ये कहा गया कि 150 देशों में इस वायरस ने दो लाख से ज्यादा शिकार किए हैं।

अभी भी खतरे के बादल पूरी तरह छंटे नहीं है इसलिए सभी बड़ी कंपनियों, सरकारी दफ्तरों, बैंकों और हॉस्पिटल अपने डाटा को सिक्योर करने के लिए शक्तिशाली एंटीवायरस की मदद ले रहे हैं। इसे अब तक का सबसे बड़ा साइबर हमला बताया जा रहा है। इसका तोड़ निकालने में फिलहाल विश्व भर के टेक एक्सपर्ट फेल हैं।

फिरौती मांगने वाला वायरस
रैंसमवेयर एक कम्प्यूटर वायरस प्रोग्राम है जो आपकी सभी कंप्यूटर्स फाइल को बर्बाद कर सकता है। इसके अटैक के साथ ही सिस्टम पूरी तरह लॉक हो जाता है। कोई मामूली सॉफ्टवेयर नहीं बल्कि इसके बारे में कहा जा रहा है कि इससे अपनी फाइलों को बचाने के लिए फिरौती (रैंसम) तक मांगी जाती है और तय समय में फिरौती न देने पाने पर इसकी डिमांड बढ़ती जाती है। शुक्रवार को जिस वायरस वानाक्राइ ने हमला किया वो इसी रैंसमवेयर का एक प्रकार है। शुक्रवार को इसी ने तबाही मचाते हुए ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस पर सबसे बड़ा हमला किया था और पेमेंट नेटवर्क 'बिटकॉइन' के ज़रिये 230 पाउंड (करीब 19 हज़ार रुपये) की फ़िरौती मांगी थी।

टेक एक्सपर्ट के पास नहीं है तोड़
यह वायरस घरेलू कम्प्यूटर्स से ज्यादा बड़ी कंपनी के ऑफिस, बैंक और सरकारी ऑफिसों के डाटा पर निशाना साध रहा है। बताया जा रहा है कि दो दिन में फिर से भारत पर हमला हो सकता है। इसके लिए सोमवार को आईटी कंपनी टीसीएस ने एहतियात बरतते हुए अपने पुराने विंडोज एक्स-पी कम्प्यूटरों को अपग्रेड करने का काम शुरू कर दिया ताकी संभावित खतरों को टाला जा सके। हालांकि अभी भारत के टेक एक्सपर्ट भी इस वायरस का हल निकालने में फिलहाल असफल हैं।

वायरस के लिए अमेरिका जिम्मेदार!
ऐसा माना जा रहा है क्योंकि व्हिसलब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन ने यूएस की नेशनल सिक्युरिटी एजेंसी पर सवाल उठाए हैं। स्नोडेन ने कहा है कि चेतावनी के बावजूद एनएसए ने ऐसे खतरनाक टूल्स डेवलप किए जिनसे कई देशों के सॉफ्टवेयर निशाने पर आ सकते थे। आज हम इसकी कीमत चुका रहे हैं। एनएसए को इसकी खामियों को तभी बता देना चाहिए था, जब उसे इसका पता लगा। यह भी बताया जा रहा है कि जिसने वायरस तैयार किया उसने एनएसए का टूल किट भी चोरी कर लिया है और टूल का उपयोग इस वायरस में कर रहा है।

रैंसमवेयर साइबर हमले के कारण बिजली आपूर्ति पर असर नहीं: पावरग्रिड नई दिल्ली, 15 मई (भाषा) केंद्रीय बिजली पारेषण कंपनी पावर ग्रिड ने आज कहा कि उसने वैश्विक साइबर हमले रैंसमवेयर से बचने के लिए पर्याप्त उपाय किए हैं और ग्राहकों को इसके कारण आपूर्ति को लेकर चिंतित होने की जरुरत नहीं है.

कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पावर ग्रिड के आला अधिकारियों ने रैंसमवेयर से निपटने की रणनीति पर विचार किया.

अधिकारी ने कहा, ‘चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक आई एस झा की अध्यक्षता में आज सुबह हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। चूंकि पावर ग्रिड का परिचालन आईटी पर आधारित है इसलिए विस्तार से विचार विमर्श किया गय।

' अधिकारी के अनुसार कर्मचारियों से कहा गया है कि वे संदिग्ध ईमेल नहीं खोलें और न ही फाइल डाउनलोड कर।

उन्होंने कहा, ‘कुछ बैंकों व अन्य क्षेत्रों के प्रभावित होने के समाचार हैं. लेकिन हमारे मामले में हमने अपनी प्रणाली के संरक्षण के लिए पर्याप्य उपाय किए हैं।



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