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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि अगर हम तीन तलाक खत्म करते है, तो क्या है आगे रास्ता

तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को भी ऐतिहासिक सुनवाई जारी रही। कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि अगर जरूरत पड़ती है तो वह तीन तलाक पर कानून भी ला सकते हैं। सुनवाई के दौरान जस्टिस ललित ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि अगर हम तीन तलाक खत्म करते है, तो आगे क्या रास्ता है। जिसके जवाब में मुकुल रोहतगी ने कहा कि हम इसको लेकर एक कानून लाएंगे। रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि सभी प्रकार के तलाक बुरे हैं। कोर्ट ने कहा कि हम इस देश में मौलिक अधिकार और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संरक्षक हैं

सरकार के सबसे बड़े वकील अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में तलाक की हर व्यवस्था को भेदभावपूर्ण बताया है और कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक, निकाह-ए-हलाला और बहुविवाह को खत्म करता है तो सरकार कानून बनाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील मुकुल रोहतनी ने पर्सनल लॉ में मौजूद तलाक की हर व्यवस्था को महिलाओं से भेदभाव करने वाला बताया। तब सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- अगर सब ख़ारिज किए गए तो तलाक कैसे होगा? अटॉर्नी जनरल ने कहा-तब हम कानून लाएंगे।

अटॉर्नी जनरल ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 (बराबरी का अधिकार) के आधार पर मामले को देखने की मांग की। नरासु अप्पा माली केस में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का विरोध किया। इस फैसले में हाई कोर्ट ने पर्सनल लॉ को अनु. 13 (समीक्षा के दायरे में आने वाले कानून) से बाहर रखा था। नरासु अप्पा माली 1951 का फैसला है।

सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर सऊदी अरब, ईरान, इराक, लीबिया, मिस्र और सूडान जैसे देश तीन तलाक जैसे कानून को खत्म कर चुके हैं, तो हम क्यों नहीं कर सकते।

आपको बता दें कि ट्रिपल तलाक को लेकर 11 मई से सुनवाई चल रही है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ ये समीक्षा करेंगे कि तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक और निकाह हलाला इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं। कोर्ट इस मुद्दे को इस नजर से भी देखेगा कि क्या तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन हो रहा है या नहीं।

सुनवाई के दौरान सीनियर वकील राम जेठमलानी भी तीन तलाक की एक पीड़िता की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 सभी नागरिकों को बराबरी का हक देते हैं और इनकी रोशनी में तीन तलाक असंवैधानिक है। जेठमलानी ने दावा किया कि वो बाकी मजहबों की तरह वो इस्लाम के भी छात्र हैं। उन्होंने हजरत मोहम्मद को ईश्वर के महानतम पैगंबरों में से एक बताया और कहा कि उनका संदेश तारीफ के काबिल है।

 



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