< क्या इसी विभाग में हुआ अरबों का घोटाला? Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News सोचिये, जब व्यवस्थाएं ही आम लोगों के जीवन को कठिन और भव"/>

क्या इसी विभाग में हुआ अरबों का घोटाला?

सोचिये, जब व्यवस्थाएं ही आम लोगों के जीवन को कठिन और भविष्य को अन्धकारमय करने में जुट जायें तो किससे आस की जाये। जिन्हें व्यवस्था करना था, अगर वे स्वयं लूटतंत्र में शामिल होकर जनता को चूना लगायेंगे तो हालात बहुत बुरे हो जायेंगे। फिलहाल बुन्देलखण्ड में वे तमाम व्यवस्थाएं अब सन्देह के घेरे में हैं जिन्हें विकास की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। जाँच के नाम पर सिर्फ सियासी बातें होती हैं और अंत में स्थिति जस की तस। शायद ये उत्तर प्रदेश की कुशल राजनीतिक जुगलबंदी ही है जो ऐसे लुटेरो को संरक्षण देती है।

अतर्रा के समाजसेवी राकेश गौतम का कहते हैं कि 2010 से अब तक बुन्देलखण्ड के प्रत्येक गांव में पशुपालन विभाग द्वारा अन्ना प्रथा उन्मूलन के कार्यक्रम आयोजित होने थे। हर वर्ष प्रत्येक गांव में दो कार्यक्रम आयोजित होने का शासन ने आदेश जारी किया था और उसके लिए शासन ने धन भी आवंटित किया था लेकिन उस धन का अधिकारियों ने बंदरबांट कर लिया। राकेश गौतम के अनुसार किसी भी गांव में अन्ना प्रथा उन्मूलन के कोई कार्यक्रम आयोजित ही नहीं हुए। उन्होंने कहा कि अगर इसकी जांच हो तो ये बहुत बड़ा घोटाला साबित होगा। हम इसके लिए बहुत जल्द प्रदेश सरकार को पत्र के माध्यम से अवगत कराएंगे और अगर कार्यवाही नहीं हुई तो सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिलेंगे।

बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जहां एक ओर भुखमरी की कगार पर लोग अपना जीवन यापन करते हैं और सरकार भी बुन्देलखण्ड के लिए विशेष पैकेज की योजना के अन्तर्गत हजारांे करोड़ का बजट देती है लेकिन वही जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी योजनाओं का बंटाधार कर देते हैं। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में किसान पशु अन्ना प्रथा से परेशान है, किसानों की फसलों को बड़ी मात्रा में अन्ना पशु नष्ट कर देते हैं जिससे किसानों का बड़ा नुकसान होता है।

फिलहाल यह जांच का विषय है कि यह घोटाला कितना बड़ा है? लेकिन बुन्देलखण्ड में जनता को आजादी के 70 वर्ष बाद भी आज मूलभूत सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है जो यह बताने को पर्याप्त है कि कैसे यहाँ तमाम योजनाओं का बंदरबांट हुआ है और किस तरह हजारों-करोड़ों रुपया लूटा गया। जांच के नाम पर रस्म अदायगी न हो बल्कि इसकी जांच स्वतंत्र एजेंसी के द्वारा किया जाना आवश्यक है, क्योंकि मामला जनता के हित से सीधा जुड़ा है। सूत्रों की मानें तो इस घोटाले की जद में सम्बंधित विभाग के अधिकारियों सहित सियासत के भीे कई बड़े दिग्गज आ सकते हैं।

About the Reporter

  • अनुज हनुमत

    5 वर्ष , परास्नातक (पत्रकारिता एवं जन संचार)

अन्य खबर

चर्चित खबरें