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धर्मनगरी चित्रकूट में इस समय डाकुओं का आतंक जोरो पर ह"/>

चित्रकूट में जब सन्त नही हैं सुरक्षित तो कैसे आयेंगे पर्यटक?

धर्मनगरी चित्रकूट में इस समय डाकुओं का आतंक जोरो पर है। जिसके चलते आये दिन किसी को पीटने की खबर आती है तो कहीं गोली चलने की, कहीं रंगदारी मांगने की तो कहीं डकैती की और तो और तपोस्थली के मंदिरो में तपस्या करने वाले सन्तों पर भी डकैतों का कहर व्याप्त है। अब तो डकैत मंदिरों व उनमें स्थापित मूर्तियों को भी निशाना बना रहे हैं। 

घटना चित्रकूट के तीर्थ स्थान कोट तीर्थ, पम्पासुर देव स्थान की है जो जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर है। कोट तीर्थ के महंत रमेश दास तथा पम्पासुर के महंत प्रेमदास विगत कई वर्षों से देवांगना घाटी स्थित इस तीर्थस्थान में रहकर तपस्या कर रहे हैं दोनों महंत सगे भाई हैं, घटना तीन दिन पहले की है जब महंत प्रेमदास महाराज संध्या कालीन आरती व भजन करने के बाद  विश्राम कर रहे थे तभी अचानक दर्जन भर डकैत मंदिर में आ धमके और प्रेमदास महाराज को गाली गलौच करते हुये उनकी कनपटी में बन्दूक लगाकर हाथ-पैर बांध कर पिटाई की व मंदिर की मूर्तियों के मुकुट व रखी हुई नकदी ले कर किसी से ना बताने की धमकी देते हुए भाग गये। धीरे-धीरे बात पुलिस तक पहुंची, मौके पर प्रशासनिक विभाग के अधिकारी पहुँच कर पूँछताछ कर रपट लिखाने के लिए कहा तो प्रेमदास महाराज ने साफ मना कर दिया और कहा कि उन्हें किसी के बारे में कुछ नहीं लिखवाना।

डकैतों के खौफ से प्रेमदास महाराज कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। आज जब दोपहर में बुन्देलखण्ड न्यूज की टीम वहां पहुंची और महंत प्रेमदास महाराज से मिलकर घटना की जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। फिर दबी जुबान से बताते हुये वापस जाने को कहा और ये भी कहा कि पुलिस की तरह वर्दी में डकैत भी जंगल में घूमते रहते हैं, तुम लोग यहाँ से चले जाओं नहीं तो वे तुम्हें भी मारेंगे, यदि उनको पता चल गया कि तुम लोग यहाँ आये थे तो अबकी बार मुझे मौत के घाट उतार देंगे।

दहशत में जी रहे प्रेमदास महाराज व रमेशदास महाराज कुछ बोलने को तैयार नहीं है। प्रशासन कागजी घोड़ा दौड़ाने का इंतजार कर रहा है। कागजी घोड़ा तैयार हो जाये तो उसमें सवार होकर तोप चलायें, भले ही शासन प्रशासन के लोग चुस्त दुरुस्त शासन का पुलिंदा बताते नजर आ रहे हो पर यहाँ पुलिसिया विभाग की लाचारी व लापरवाही साफ नजर आ रही है।

एक तरफ धर्मनगरी चित्रकूट धाम के पर्यटन के लिए जनप्रतिनिधि सरकार द्वारा करोड़ों के बजट में मोहर लगवा रहे हैं वहीं डकैत मधुमक्खी की तरह पूरे जनपद में मंडरा रहे हैं। जो अब मंदिरों की मूर्तियों को भी लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। योगीराज में क्या धर्मनगरी चित्रकूट के मंदिर, पुजारी व देवी-देवताओं की मूर्तियां सुरक्षित रह पायेंगी? आखिर कब इन बेखौफ डकैतों पर लगाम लगाई जायेगी? जो आये दिन कोई ना कोई घटना को अंजाम देने का दुस्साहस कर रहे हैं। इसे प्रशासन की कमजोरी कहें या लाचारी ये सारे सवाल लोगों के जेहन में बार-बार उठने को मजबूर हो जाते हैं।

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