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कैनबरा में कोरोना के लिए सरकार व समाज की तैयारियां

@सौरभ चन्द्र द्विवेदी, विश्लेषक
 
यह लेख अप्रवासी भारतीय नागरिक सामाजिक यायावर का है , जिन्होंने विभिन्न देश की सरकार व समाज की तैयारियों पर लिखा है और भारत की तुलना की है।
 
लगभग दस दिन पहले 12 मार्च को कैनबरा में पहला कोरोना केस कन्फर्म हुआ था। परसों तक 9 केस कन्फर्म हुए थे, कल तक 19 केस कन्फर्म हुए थे। इनमें से लगभग सभी केस ऐसे हैं जो जब कैनबरा आए तब कोरोना से प्रभावित थे। मतलब यह कि अभी तक कैनबरा में कोरोना मानव से मानव व अन्य प्रकार के संवहन के द्वारा नहीं फैला है, जो भी केस हैं वे कैनबरा के बाहर से ही कोरोना से संक्रमित होकर ही आए हैं।
 
इसके बावजूद जब कैनबरा में एक भी केस नहीं था, तब से ही कोरोना की टेस्टिंग शुरू है। कल तक  कुछ कम अधिक लगभग 2500 लोगों की टेस्टिंग हो चुकी थी, लगातार टेस्टिंग हो रही है, टेस्टिंग के और अधिक केंद्र खोले जा रहे हैं। जब कैनबरा में केस की संख्या एक से बढ़कर तीन हुई तब से कैनबरा के लोगों व सरकार ने रणनीतियां व योजनाएं बनानी शुरू कर दीं, ताकि लोग धीरे-धीरे अपने आपको तैयार कर सकें, एक झटके में बिना तैयारी के अचानक कुछ न करना पड़े, ताकि लोगों का जीवन अस्तव्यस्त न हो।
 
सरकार ने अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या व अन्य सुविधाएं व क्षमताएं बढ़ाना शुरू कर दिया, ताकि भविष्य में यदि लोगों को भर्ती करना पड़े तो अफरातफरी का माहौल न हो, अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षा व सुविधा उपलब्ध हो। केंद्र सरकार की योजनाओं के अलावा कैनबरा सरकार बहुत कुछ कर रही है। कैनबरा में महज चार लाख (400000) लोग निवास करते हैं। 
 
कैनबरा सरकार 1200 करोड़ रुपए से अधिक पहले चरण में रिलीज कर रही है। भविष्य में कई चरणों में और फंड रिलीज करेगी। इसके अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट मतलब बस मेट्रो इत्यादि मुफ्त कर दिया है। पार्किंग मुफ्त हो गई है। लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी अधिकतर सरकारी फीसें माफ कर दी गई हैं। कारों का पंजीकरण, वार्षिक पंजीकरण इत्यादि फीसें माफ कर रही है। जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जो लोग वृद्ध हैं, उन लोगों के बिजली पानी गैस इत्यादि बिल माफ हो रहे हैं। एकमुश्त धनराशि दी जा रही है अलग से। 
 
कैनबरा समाज की तैयारियां
 
कैनबरा समाज मोहल्ले स्तर पर स्वयंसेवी संगठन बना रहा है। जो एक दूसरे की छोटी से बड़ी हर तरह से मदद करेंगे। आर्थिक मदद भी।
 
छोटी सी छोटी चीज मतलब आपको आने वाली काल्स का जवाब देना। आपके रिश्तेदारों व परिवार को आपके कुशल क्षेम की सूचना का आदान प्रदान। आपके घर में भोजन व आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति। आपके पत्र, आपके पार्सल को भेजना व आप तक लाना। आपके लिए दवाओं की आपूर्ति करना। यदि आप भोजन बना पाने में अक्षम हैं तो भोजन की आपूर्ति। रेस्टोरेंट से आपके लिए भोजन लाना। ऐसा ही बहुत कुछ एक दूसरे का सहयोग करने के लिए स्वैच्छिक, मजबूत, जिम्मेदार व ईमानदार भाव वाले संगठन बन रहे हैं।
 
मजेदार बात यह है कि जो लोग अशक्त नहीं हैं, वे सभी स्वयंसेवा देने के लिए तैयार हैं। देश का सबसे बड़ा नौकरशाह, अधिकारी, प्रोफेसर, अरबपति, करोड़पति सभी स्वयंसेवी बन रहे हैं। मतलब यह कि एक अरबपति किसी गरीब के लिए खाना बनाएगा, उसके घर की साफ सफाई करेगा।
 
मतलब यह कि बहुत बड़ा सरकारी अधिकारी सरकारी तंत्र के सबसे निचले स्तर के कर्मचारी के घर का सामान ढोकर लाएगा, उसकी चीठी पत्री को डाकखाने जाकर पोस्ट करेगा। मैं व बेगमसाहिबा भी अपने मोहल्ले के संगठन के स्वयंसेवक हैं।
 
 
दो शब्द ऑस्ट्रेलिया सरकार के बारे में
 
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के उन चंद देशों में है जो सबसे अधिक टेस्टिंग कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में कुल लगभग ढाई करोड़ लोग रहते हैं, और ऑस्ट्रेलिया अब तक लगभग डेढ़ लाख लोगों की टेस्टिंग कर चुका है। वह भी बिना हल्ला-गुल्ला व शोशेबाजी के।
 
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का वह इकलौता देश है जिसने सबसे पहले अपने लोगों से कहा कि जो भी ऑस्ट्रेलिया के नागरिक व आजीवन स्थाई-निवासी हैं, वे ऑस्ट्रेलिया वापस लौट आएं ताकि उनके कारण दूसरे देशों के संसाधनों पर दबाव न बढ़े। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कोरोना के संदर्भ में देश के लोगों से झूठ नहीं बोला, कोई नौटंकी नहीं की, झूठी दिलासा नहीं दी, झूठ व ढोंग से भरे समाधान नहीं बताए। लोगों से ईमानदारी से बात की, लोगों को विश्वास में लेकर रणनीतियां व योजनाएं बनाईं।
 
ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कहा कि सरकार का पैसा लोगों का पैसा है, सरकार का जो कुछ भी है वह लोगों का है। सरकार ने बीसियों हजार करोड़ रुपए की योजनाएं पहले ही खेप में देश के लोगों के लिए खोल दीं। बेरोजगारी व स्टार्टअप भत्ता बढ़ा कर डेढ़ लाख (150000) रुपए महीना से अधिक कर दिया। ऐसी योजनाएं लागू कर रही है कि लोगों के पास आर्थिक संसाधन उपलब्ध रहें। विभिन्न कर माफ किए जा रहे हैं, करों में छूट दी जा रही है।
 
बड़ी बात यह है कि सरकार जो भी योजनाएं व रणनीतियां बना रही है, वे सब कम से कम 6 महीने के लिए बना रही है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आगामी 6 महीने, 12 महीने, 18 महीने या अधिक समय के लिए लोगों को भोजन व जीवन की जरूरतों व सुविधाओं में कमी न होने पाए।
 
सबसे बड़ी बात यह है कि लोग हो, समाज हो, सरकार हो सभी ने सबसे ऊपर समाज को रखा है। राजनैतिक पूर्वाग्रह, राजनैतिक चोचलबाजी, राजनैतिक हानि-लाभ इत्यादि-इत्यादि को बहुत पीछे धकेल दिया गया है। जब लोग ही नहीं रहेंगे, जब समाज ही नहीं रहेगा, जब देश ही नहीं रहेगा तो राजनीति का क्या अचार डालेंगे। अंत में एक लाइन जोड़ना चाहूंगा कि इन सब बातों का संबंध किसी देश की जनसंख्या के कम या अधिक होने से उतना नहीं होता जितना कि ईमानदार भावना, आपसी विश्वास, जिम्मेदारी, जवाबदेही इच्छाशक्ति, संवेदनशीलता, दूरदृष्टि, समझदारी व वास्तविक जागरूकता इत्यादि से होता है। 

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