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कोरोना से निपटने के सरकारी दावे फेल

बांदा,

सीएमएस ने कहा 3 मरीज आए थे आज उनकी भी हुई छुट्टी

समूचे विश्व में महामारी का रूप धारण कर चुकी कोरोना की बीमारी से भारत भी चपेट में आ चुका है। जिसे रोकने के लिए देश के प्रधानमंत्री द्वारा लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है। लेकिन बुन्देलखण्ड के जनपद बांदा में इस जानलेवा बीमारी के प्रति प्रशासन सजग नहीं है। यही वजह है कि यहां हर व्यक्ति प्रशासन को कोस रहा है। यहां के अस्पताल में न तो मरीजों की ठीक से जांच की जा रही है नहीं सस्ते दामों पर मास्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मेडिकल स्टोरों में दवा के बजाय मास्क बिक बिक रहे हैं। जिनके दाम मनमाने ढंग से वसूल किए जा रहे हैं। यहां कितने मरीज भर्ती हैं किन का इलाज हो रहा है कौन सा मरीज ठीक हो गया है किसी तरह की जानकारी नहीं दी जा रही है।

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जनपद में अब तक आधा दर्जन मरीज आ चुके हैं स्वास्थ्य विभाग की मानें तो सिर्फ तीन मरीज मेडिकल काॅलेज में भर्ती थे। इन्हें भी आज स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया है।

कई मरीजों की संख्या को लेकर भी भ्रांतियां हैं। कल जिला अस्पताल में 2 मरीज भर्ती किए गए थे, जबकि सीएमओ ने इन मरीजों के बारे में किसी भी जानकारी से इंकार किया था।

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आधी अधूरी तैयारी
संक्रमित मरीज को रखने के लिए जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बनाने का दावा किया गया लेकिन यहां आने वाले मरीज को सीधे मेडिकल काॅलेज का रास्ता दिखाया जा रहा है। बताते हैं कि यहां डाक्टरों की पर्याप्त संख्या न होने के कारण जिला अस्पताल को कोरोना से संबंधित मरीज को रेफर कर देता है। इस तरह देखा जाए तो यह केंद्र रिफर सेंटर बनकर रह गया है। बताया तो यह भी गया है कि यहां आने वाले मरीज को डाॅक्टर या स्वास्थ्य कर्मी छूना भी मुनासिब नहीं समझते हैं। इस तरह के कई मामले संज्ञान में आए हैं जब डाक्टरा ने बिना जांच के ही उन्हें मेडिकल काॅलेज से रवाना कर दिया।

मास्क व सैनिटाइजर की कालाबाजारी
स्वास्थ्य विभाग इस जानलेवा बीमारी से बचने के लिए हाथ धोने के लिए सैनिटाइजर और मुंह में मास्क लगाने की सलाह दे रहा है। वही बांदा में स्वास्थ्य विभाग अपने ही कर्मचारियों को मास्क उपलब्ध नहीं करा पा रहा। जबकि शासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग को मास्क उपलब्ध कराए गए थे, उपलब्ध कराए गए मास्क कहां गए। सीएमओ कार्यालय व जिला अस्पताल में तमाम कर्मचारी बिना मास्क के घूम रहे हैं। इधर बाजार में मास्क व सैनिटाईजर की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है।

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प्रशासन द्वारा सिर्फ आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी रोकने की बंदर घुड़की दी जा रही है। जबकि वास्तव में कालाबाजारी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां बनने वाले मास्क रू 50 से लेकर रू 100 तक बिक रहे हैं। कमोवेश यही स्थिति सैनिटाइजर की है मेडिकल स्टोर वाले इनकी मनमानी कीमत वसूल रहे हैं 40 से 50 में मिलने वाला सैनिटाइजर ब्लैक में रू 200 तक में बिक रहा है।

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इस संबंध में जिला अस्पताल के सीएमएस का कहना है कि कोरोना बीमारी से निपटने के लिए 2 लाख का बजट आया था। जिसके मास्क सैनिटाइजर के लिए आर्डर दिए गए हैं। इस बीच जिला अस्पताल पहुंचने वाले कई मरीजों ने आरोप लगाया है कि जिला अस्पताल में किसी तरह के इंतजाम नहीं हैं जांच करने के बजाए वहां से मरीजों को टरका दिया जाता है। इधर आज जिला अस्पताल का कमिश्नर व डीएम ने पहुंचकर निरीक्षण किया और आइसोलेशन वार्ड पहुंचकर सब कुछ ठीक होने का दावा किया।

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