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फर्जी डिग्री लगाकर शिक्षा मित्र बन गया सरकारी अध्यापक

बाँदा,

भ्रष्टाचार मुक्त शासन प्रशासन व सरकार देने की सपने दिखाकर सत्ता में आई उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है यहां नेता से लगाकर मंत्री और शासन-प्रशासन में बैठे भ्रष्ट अधिकारी भ्रष्टाचार में आकंठ तक डूबे हुए हैं वैसे तो सभी विभागों में नटवरलाल बैठे हुए हैं लेकिन एक  शिक्षा मित्र ने ऐसे कारनामे कर डाले जिसे जानने के बाद शिक्षा विभाग के होश उड़ गए उसने शिक्षामित्र रहते हुए स्कूल के सरकारी खातों से लाखों रुपए हड़प डालें और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पता ही नहीं चला।

यह मामला बांदा जिले के बिसंडा ब्लाक अंतर्गत सया गांव की प्राथमिक विद्यालय का है, जहां सन 2003 में 23 मार्च को ग्राम पंचायत कोर्रा खुर्द निवासी दिनेश सिंह पटेल 16 महीने नौकरी करने के बाद 05सितम्बर,04 को अवैतनिक अवकाश लेकर संस्थागत छात्र के रूप में बीएड की डिग्री लेने चला गया था और दोबारा 24,अप्रैल ,05 को दोबारा उसी स्कूल में शिक्षामित्र के पद पर  पदभार ग्रहण कर लिया और इस बीच फर्जी हेरफेर कर बीएड  करने गए अवैतनिक अवकाश 7 माह 19 दिन का वेतन भी निकाल लिया।

बताया जाता है कि लंबे समय तक अवकाश में रहने पर शिक्षामित्र की सेवा स्वतः समाप्त हो जाने की विधि व्यवस्था के साथ प्रधानाध्यापक द्वारा शिक्षामित्र दिनेश सिंह को पदभार ग्रहण करवाने से मना कर दिया गया था लेकिन दोबारा बिना निर्धारित प्रक्रिया के पालन के शिक्षामित्र पद की चयन प्रक्रिया को पूर्ण किए हुए सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दिनेश सिंह को दोबारा पदभार ग्रहण करने का आदेश प्रधानाध्यापक को दिया। जिससे एबीएसए की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती हैइस समय  नटवरलाल बना शिक्षामित्र दिनेश पटेल नरैनी ब्लॉक अंतर्गत गुढा गांव में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात है।  

उसने यह पद अपनी फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल करें हासिल किया है। पिछले दिनों पूरा मामला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिश्चंद्र नाथ की संज्ञान में आया तो उन्होंने खुद मौके पर स्कूल जाकर अभिलेखों का गहन अध्ययन किया तथा वही तत्काल खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि तत्काल उस समय पर निकाले गए भुगतान की बैंक डिटेल बैंक से निकला कर अपनी जांच के साथ सम्मिट करें ताकि  इस नटवरलाल को के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की जा सके। 

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