< बुन्देलखण्ड के व्यापारी टैक्स में लक्ष्य से ज्यादा भर रहे हैं सरकार की झोली Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News बांदा,

उत्तर प्रदेश में वाणिज"/>

बुन्देलखण्ड के व्यापारी टैक्स में लक्ष्य से ज्यादा भर रहे हैं सरकार की झोली

बांदा,

उत्तर प्रदेश में वाणिज्य कर देने में बुन्देलखण्ड के व्यापारी टैक्स में सरकार की झोली लक्ष्य से ज्यादा भर रहे हैं। अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 तक झांसी जोन को 718.87 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष 801.05 करोड़ राजस्व अर्जित किया गया। यह लक्ष्य से 11 प्रतिशत अधिक है। जोन को वित्तीय सत्र 2019- 2020 में कुल 872.93 करोड़ का लक्ष्य दिया गया है।इसी तरह उत्तर प्रदेश में वाणिज्य कर देने में बुन्देलखण्ड के व्यापारी सबसे आगे है ,यह स्थिति तबहै जब यहां उद्योग धंधे व कल कारखानों की संख्या कम है।

यहां के 99 फीसदी व्यापारी हर माह कर भर रहे हैं। टैक्स की उगाही भी लक्ष्य से अधिक हो रही है। वाणिज्य कर झांसी जोन के अंतर्गत बुन्देलखण्ड के झांसी के अलावा जालौन, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदाचित्रकूट आते हैं। बुन्देलखण्ड में कल कारखानों और बड़े उद्योगों की कमी होने के बाद भी यहां के व्यापारी टैक्स देने में सबसे आगे हैं। झांसी जोन में 34500 व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत हैं। इनमें 23000 के करीब हर महीने रिटर्न जमा करते हैं। जबकि, बाकी व्यापारी तीन महीने में रिटर्न दाखिल करते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि 23000 में 99 फीसदी से अधिक व्यापारी हर महीने रिटर्न जमा कर रहे हैं। यह प्रतिशत यूपी के सभी 15 जोन में सबसे अधिक है।

कमिश्नर वाणिज्य की अध्यक्षता में लखनऊ मुख्यालय पर आयोजित बैठक में झांसी के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन प्रदीप कुमार सिंह की प्रशंसा की गई। यहां प्रदीप कुमार सिंह, एडिशनल कमिश्नर ने कहा कि बुन्देलखण्ड में बड़ी फैक्टरियां जरूर नहीं हैं, लेकिन यहां के कारोबारी रिटर्न और टैक्स देने में यूपी में सबसे आगे चल रहे हैं।

झांसी जोन में उद्योग और बड़ी फैक्टरियों का अभाव है। इसके बाद भी डायमंड सीमेंट से हर महीने 16 से 17 करोड़, सड़क बनाने वाली कंपनी गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड से चार से पांच करोड़, जीएमआर इंफ्रास्ट्रेक्चर से एक करोड़, जेएमके ऑटो मोबाइल्स से पांच से छह करोड़ व सूरी ऑटोमोबाइल्स से दो से ढाई करोड़

वाणिज्य कर विभाग को पहले भेल, पारीछा थर्मल पावर प्लांट, रेलवे से करोड़ों रुपये का टैक्स मिलता था, लेकिन अब भेल सीजीएसटी से जुड़ गया है। रेलवे का टैक्स इलाहाबाद मुख्यालय में जमा होने लगा है। पारीछा थर्मल पावर प्लांट का टैक्स लखनऊ में जमा हो रहा है।

अन्य खबर

चर्चित खबरें