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जब बुरा महसूस हो तो जिंदगी को समझें

@सौरभ चन्द्र द्विवेदी, विश्लेषक

अब ; जब कभी महसूस होता कि कुछ बुरा होने वाला है या बुरा हो सकता है। एक संभावना नजर आई तो फिर मैं सोचने लगता कि जब मेरी बाईक चोरी हुई तो क्या मैं कुछ कर पाया। 

हाँ ; दस कदम में सामने ही विपरीत दिशा में खड़े दो लोगों से चर्चा कर रहा था। तनिक नजर ओझल हुई कि अपने ही इलाके मे बाईक चोरी हो गई। जबकि इसी बाईक से लंबे सफर करना और बाहर रात रूकना होता रहा। कभी सोचा नहीं जा सकता था कि कोई ऐसी हिमाकत कर सकता है। 

चूंकि मैंने सबकुछ बचपन से देखा कि कोई कम से कम हमारे साथ हमारे ही क्षेत्र मे ऐसा करने की हिम्मत नहीं कर सकता ! परंतु होनी को कौन टाल सकता है ? 

इसलिए बुरा घटित होने को महसूस कर स्वयं ही मन कहता है कि क्या कर सकते हो ? कुछ वश मे है क्या ? कितना कुछ तो हम सोचते हैं पर बहुत कुछ होते-होते रह जाता है , यही जीवन है। जिंदगी का सच है कि कब - कहाँ और किसको सबकुछ मिला है !

जो हम कल्पना नहीं कर सकते , वो घटना जीवन मे घटित हो जाती है। जिंदगी मे अनेक मोड़ आते हैं , सच मानो तो हर शख्स कहीं ना कहीं भीतर - भीतर जंग लड़ रहा होता है। वह जिंदगी से जंग भीतर से बाहर प्रगतिशील दिखता हुआ लड़ता रहता है। ऐसी जंग अंदुरूनी कमोवेशी को लेकर शुरू रहती है। 

एक सुकून की तलाश मे जिंदगी बीत जाया करती है , असल मे सुकून जहाँ मिला , जिससे मिला वो सुकून ही लम्हा - लम्हा दूरी बना रहा होता है। उस सुकून की अनुपस्थिति मे उपस्थिति भी बेसुकून ( व्याकुल ) कर देती है। 

जीवन की खोज ही सुकून है ? पल भर का सुकून जीवन की खोज का स्वरूप बन जाता है। यह निहित है इंसान की प्रकृति और आवश्यकताओं की इच्छाशक्ति मे , जिसको जिसमे - जहाँ सुकून मिल जाए। 

मुझे अपनी बाईक चोरी चले जाना का दुख हुआ पर यह भी जीवन दर्शन बन गया। अब महसूस हो जाता कि होना होगा तो हो जाएगा , अन्यथा कितना कुछ जीवन में अनचाहा रह जाता है। उस अनचाहे के साथ हमें जीवन जीना होता है। 

फिर भी यह सच है कि सोचा हुआ बहुत कुछ साकार किया जा सकता है। आकर्षण के सिद्धांत के तहत मनुष्य मनचाहा पा सकता है। यह सही मे कल्पनाओं का सिद्ध होने जैसा है कि मनुष्य की कल्पना शक्ति ही उसके जीवन की वास्तविक उड़ान होती है। वह कल्पनाओं से आकर्षित कर एक ना एक दिन वो पा लेगा , जो वह अपने जीवन मे चाहता है। 

प्रकृति हमारा निर्माण करने मे चोट भी देती है। वह चोट जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। वही हिम्मत महसूस कराती है और सार तत्व को स्पर्श करने लायक मन की शक्ति प्रदान करती है , महसूस करने की क्षमता। 

जीवन और व्यक्ति का उम्दा विश्लेषण हो सकता है। घटना और घटित होने से जीवन मे आए बदलाव और संकेत को महसूस करने से बताया जा सकता है कि हाँ जीवन मे ऐसा होता है। 

कुछ अनचाहे साथ मिला करते हैं और कुछ चाहने वाले साथ हृदय की हथेली से शनैः शनैः अथवा झटके मे छूट जाया करते हैं , यह जीवन का नसीब है। 

अब डर नहीं लगता कुछ बुरा हो जाने से बल्कि सोचता हूँ कि होना होगा तो हो जाएगा , मैं रोक नहीं सकता। चूंकि पल भर की बात होती है और पल भर में कुछ घटित होने से जीवन से भ्रम नष्ट हुआ करता है और सत्य से रूबरू होने का अवसर मिला करता है , सत्य का मतलब ईश्वर के अस्तित्व से रूबरू होना। उस वक्त किसी शक्ति का अहसास होता है। 

इसलिये हमेशा जीवन मे कुछ बुरा हो जाने से बुरा नहीं होता , बल्कि वह जीवन की भलाई भी होती है। मुझे बाईक चोरी होने से यही जीवन दर्शन मिला। 

बेशक प्रत्येक जिंदगी का समयानुकूल जीवन दर्शन होता है। रहस्य सिर्फ व्यक्त - अव्यक्त मे है। कोई व्यक्त कर देता है और कोई अव्यक्त रखता है। यह अंतर्मन की बात है और मन - प्रकृति की बात है। किन्तु जिंदगी मे स्व - जीवन दर्शन को महसूस करना जिंदगी जीना होता है। यहीं से हम जीवन तत्व और सूक्ष्मता से आत्मज्ञान प्राप्त करते हैं। 

आपने आत्मज्ञान प्राप्त किया है तो महसूस करिए जीवन हमसे क्या चाहता है ? बस वही जीवन मे करना चाहिए फिर बहुत से बेजा संघर्ष स्वयं समाप्त हो जाते हैं। संसार महकदार - हवादार बाग बन जाता है। हाँ जीवन के बाग मे बहार ही बहार हो। यह साँसो से अहसास हो। जीवन को समझिए , जीवन को महसूस करिए , हाँ यही जीवन है। 

होनी को कोई टाल नहीं सकता। इसलिए होने दीजिए जो होता है , आप बस प्रयास करिए। प्रयास ही जीवन है , प्रयास मे ही जीवन है। उत्तम महसूस करिए उत्तम परिणाम मिलेगा परंतु घटित होने तक धैर्य और अच्छा होने की आशा रखना जीवन का सार तत्व है। 

धन्यवाद जिंदगी ! 

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