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घाटी की जमीनी हालात का जायजा लेने पहुंचा 25 विदेशी राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल

श्रीनगर,

जर्मनी, कनाडा, फ्रांस और अफगानिस्तान समेत 25 देशों के राजनयिक बुधवार को जम्मू-कश्मीर पहुंचे। यह प्रतिनिधिमंडल अनुच्छेद 370 हटाए जाने के छह महीने बाद जमीनी हालात का जायजा लेने पहुंचा है। पिछले महीने अमेरिकी राजदूत के नेतृत्व में 15 सदस्यीय डेलिगेशन ने कश्मीर का दौरा किया था। अधिकारियों के मुताबिक, इस बार यूरोपियन यूनियन के साथ खाड़ी देशों के राजनयिक जम्मू-कश्मीर पहुंचे हैं।

दल में यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों के राजनयिक शामिल हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत कीनेथ आई जस्टर समेत 15 राजनयिकों के एक दल ने 9-10 जनवरी को जम्मू व श्रीनगर का दो दिवसीय दौरा किया था। इससे पहले दिसंबर में यूरोपीय यूनियन के सांसदों ने भी घाटी का दौरा कर यहां के हालात जाने थे।

गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को सदन को बताया कि किसी भी भारतीय नागरिक के जम्मू-कश्मीर जाने पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं है। उनसे सवाल पूछा गया था कि सरकार भारतीय प्रतिनिधियों को जम्मू-कश्मीर जाने की मंजूरी कब देगी। इसके जवाब में रेड्डी ने बताया कि ऐसी कोई रोक ही नहीं है। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि 15 देशों के प्रमुखों ने 9 से 10 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर की यात्रा की थी। इन देशों में अर्जेंटीना, बांग्लादेश, फिजी, गुयाना, मालदीव, मोरक्को, नाइजर, नाइजीरिया, नॉर्वे, फिलीपींस, पेरू, दक्षिण कोरिया, टोगो, अमेरिका और वियतनाम शामिल हैं।

भारत ने पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया था। इसके बाद पाकिस्तान विदेशी मंचों पर इस मुद्दे को उछाल चुका है। हालांकि, उसे अब तक सफलता नहीं मिली है। इससे पहले, यूरोपियन यूनियन के 25 सदस्यों के एक दल ने अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों से हालात की जानकारी ली थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में 15वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाने वाले हैं। यूरोपीय संसद ने हाल ही में भारत के नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और अनुच्छेद 370 के खिलाफ लाए गए संयुक्त प्रस्ताव पर वोटिंग को मार्च तक के लिए स्थगित स्थगित कर दिया गया।

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