सिंदूर की खेती से किसान की जिंदगी होगी खुशहाल

हमीरपुर,

भारतीय सेना की नौकरी छोड़कर एक बुंदेली किसान बंजर जमीन में उम्मीदों की खेतीपाती कर रहा है। किसान ने प्रयोग के तौर पर एक बीघा खेत में सिंदूर के फल की खेती शुरू की। मेहनत रंग लाई और किसान की उम्मीदों को बल मिलने लगा। सोमवार को किसान ने पुलिस परेड ग्राउण्ड में आयोजित बुन्देलखण्ड स्तरीय किसान मेले में सिंदूर की खेती का प्रदर्शन कर इसके नफे.नुकसान के बारे में विस्तार से बताया।

हमीरपुर में आयोजित बुन्देलखण्ड स्तरीय किसान मेला में आया और अधिकारियों को सिन्दूर की खेती करने के नफे नुकसान के बारे में बताया। जनपद के गोहांड ब्लाक के बिगवां गांव निवासी महिपाल सिंह पुत्र करोड़े प्रसाद ने सात साल पूर्व सिन्दूर के पौधे एक बीघे खेत में लगाये थे। अब इस वर्ष सिन्दूर के फल तैयार हो गये हैं। उसने पूरे खेत में अस्सी पौधे रोपित किये थे जिसमें एक पौधे में 40 किलोग्राम सिन्दूर के फल तैयार हो गये हैं। हालांकि अभी सिन्दूर के फल हरे है जिन्हें पकने में दो हफ्ते का समय लगेगा। किसान ने बताया कि अब सिन्दूर के पौधों में हर साल फल लगेंगे और आमदनी प्रतिवर्ष दोगुनी होगी।  

बता दें कि इस किसान के तीन बेटे हैं। तीनों बेटों को खेतीबाड़ी से पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाया है। उसका कहना है कि बाजार में जो सिन्दूर मिलता है उसमें केमिकल मिला रहता है जिससे माथे पर लगाने से त्वचा संबन्धी बीमारी होती है। लेकिन उनके खेत में तैयार सिन्दूर लगाने से मस्तिष्क को ठंडक मिलती है। इसकी डिमांड अभी से होनी लगी है। 

कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाण् एसपी सोनकर ने बताया कि इस जनपद में पहली बार सिन्दूर के पौधे तैयार कर एक किसान ने आमदनी का नया रास्ता बनाया है। अब महिपाल सिंह जैसे किसान से लोग प्रेरणा लेकर बागवानी के साथ सिन्दूर के पौधे लहलहायेंगे। उन्होंने बताया कि सिन्दूर के पौधे तैयार करने में सिर्फ एक बार ही लागत आती है लेकिन बाद में बिना लागत के ही हर साल इससे दोगुना लाभ किसान को मिलेगा। 

भोपाल से 3500 रुपये में लिये थे सिंदूर के पौधे
किसान ने बताया कि सात वर्ष पूर्व प्रदेश सरकार ने किसानों को मुफ्त भ्रमण कराया था। भोपाल के सरकारी अनुसंधान में सिन्दूर के पौधे देखकर मन में इच्छा हुयी कि इसे अपने खेत में रोपित किया जाये। इसके लिये साढ़े तीन हजार रुपये के पौधे लिये गये और एक बीघे की भूमि में इसे लगाया। उन्होंने बताया कि सिंदूर के अस्सी पौधे तैयार हो गये हैं। इसमें फल भी लग चुके हैं। एक पौधे से चालीस किलोग्राम सिन्दूर मिलेगा। किसान के मुताबिक एक बीघे में तैयार किये गये सिन्दूर के पौधों से 80 हजार रुपये का फायदा होगा।

बागवानी के लिये छोड़ी भारतीय फौज की नौकरी 
किसान महिपाल सिंह ने आज शाम हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत करते हुये बताया कि हाईस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 1980 में भारतीय सेना में उसे नौकरी मिली थी। ट्रेनिंग के लिये सहारनपुर के रुड़की भेजा गया थाए जहां ट्रेनिंग पूरी होने पर वह सैनिक बन गया था। लेकिन मन नहीं लगा और नौकरी से इस्तीफा देकर वह घर लौट आया। उसका कहना है कि नौकरी छोड़कर खेतीबाड़ी शुरू कीए लेकिन दैवीय आपदा में फसलें उम्मीद के मुताबिक नहीं मिली इसीलिये बागवानी की तरफ कदम बढ़ाया। 

बागवानी से हर साल लाखों की होती है आमदनी
महिपाल सिंह ने बताया कि चार बीघे खेत में आंवलाए अमरूदए मुसम्मी की बागवानी कीए जिससे इस वर्ष उसे सीधे तौर पर डेढ़ लाख रुपये का फायदा हुआ है। उसका मानना है कि बुन्देलखंड क्षेत्र में पिछले कई दशक से दैवीय आपदाओं के कारण किसान उबर नहीं पा रहा हैंए इसलिये अब घर और परिवार चलाने के लिये बागवानी की फसल संजीवनी की काम कर रही है। बागवानी तैयार करने में कम लागत खर्च होती है फिर इसके बाद लगातार और हर साल डेढ़ लाख से तीन लाख रुपये तक की आमदनी बढ़ती जाती है।