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पद्माकर की होली का रंग अनंत की कविताओं में झलकता था -सुरेश आचार्य

सागर,

नगर के प्रतिष्ठित कवि स्व.जी.पी. चतुर्वेदी अनंत का स्मृति पर्व रविवार को आदर्श संगीत महाविद्यालय में सम्पन्न हुआ।"श्यामलम्" संस्था द्वारा आयोजित इस वार्षिक आयोजन की शुरुआत अतिथियों द्वारा स्मृति दीप प्रज्ज्वलन व स्वर्गीय चतुर्वेदी के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। श्यामलम् सचिव कपिल बैसाखिया,कोषाध्यक्ष हरी शुक्ला, श्रीमती कल्पना मिश्रा, कविकमल चतुर्वेदी एवं श्रद्धा पचौरी ने अतिथि स्वागत किया। श्यामलम् अध्यक्ष उमाकांत मिश्र ने कार्यक्रम परिचय एवं स्वागत उद्बोधन दिया। लोकगायक देवी सिंह राजपूत ने स्वर्गीय चतुर्वेदी की पुस्तक समय के पृष्ठ की एक कविता 'अक्षरदान करो' का सुमधुर गायन किया। डॉ.आदित्य चतुर्वेदी ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम का गरिमामय संचालन बृज बिहारी उपाध्याय ने किया। अंबर चतुर्वेदी चिंतन ने आभार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.सुरेश आचार्य ने कहा कि पद्माकर की होली का रंग अनंत जी की कविताओं में झलकता था।आपातकाल घोषित किए जाने पर उनके द्वारा लिखी कविता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नौकरी में रहते हुए साहस के साथ अपनी बात को चतुराई से प्रकट करने वाले कवि कम मिलेंगे।कवि अनंत का जीवन जहां न्याय, निष्ठा,ईमानदारी और परोपकारी स्वभाव के लिए चर्चित रहा, वहीं सागर के साहित्य समाज में उनकी मौन तथा गुरु गंभीर साधना भी श्रद्धा और आदर का विषय रही है।कविता पर,राजनीति पर, साहित्य और धर्म दर्शन पर उनका गहन अध्ययन चमत्कृत कर देता था।

वरिष्ठ कवि निर्मल चंद निर्मल ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि इंसानियत का जो तकाजा है वह काव्य से आता है। उन्होंने स्व.चतुर्वेदी स्मृति पर्व का उल्लेख करते हुए उनके परिजनों और श्यामलम् को इस बात के लिए सराहा कि उन्होंने इसके माध्यम से अनंत जी की स्मृति को जन-जन तक पहुंचाया है। विशिष्ट अतिथि कैलाश तिवारी विकल एवं लोक गायक हरगोविंद विश्व ने भी स्व.अनंत के व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके 

संस्मरण सुनाए तथा श्यामलम् संस्था द्वारा सागर की साहित्यिक सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए किए जा रहे रचनात्मक आयोजनों की प्रशंसा की।

कार्यक्रम में नगर के ख्यातिप्राप्त गीतकार कवि डॉ.श्याम मनोहर सीरोठिया को स्व.जी.पी. चतुर्वेदी अनंत स्मृति "काव्य वाचस्पति सम्मान" प्रदत्त किया गया। श्यामलम् के कार्यकारिणी सदस्य रमाकांत शास्त्री ने डॉ.सीरोठिया का जीवन परिचय दिया तथा स्वर संगम संस्था के अध्यक्ष हरीसिंह ठाकुर ने सम्मान पत्र का वाचन किया। डॉ.सीरोठिया ने अपने सम्मान के संदर्भ में बोलते हुए कहा कि चतुर्वेदी जी के परिजनों द्वारा श्यामलम् के माध्यम से किया जाने वाला यह आयोजन निश्चित ही समाज में अनुकरणीय है।

इस अवसर पर प्रो.उदय जैन,डॉ.गजाधर सागर,अशोक मिजाज़,डॉ.महेश तिवारी, डॉ. विनोद तिवारी,पी.आर.मलैया,डॉ.अरविंद गोस्वामी,टी.आर.त्रिपाठी,गोवर्धन पटेरिया, आशीष ज्योतिषी,आर.के. तिवारी,जितेंद्र पप्पी तिवारी, मुकेश निराला,भगवानदास रायकवार, डॉ. नलिन जैन,डॉ. भुवनेश्वर तिवारी,के.एल. तिवारी अलबेला,पुष्पेंद्र दुबे,संतोष तिवारी, अखिलेश शर्मा,उमाशंकर रावत,एम.शरीफ, रमेश दुबे,डॉ.ऋषभ भारद्वाज,पुष्पदंत हितकर, मुकेश तिवारी, कमलेश तिवारी, श्रीमती सरोज बड़ोन्या,आज्ञा तिवारी, वंदना चतुर्वेदी, अनीता चतुर्वेदी, आयुषी चतुर्वेदी, पुरुषोत्तम उपाध्याय, वेद प्रकाश पाराशर, अवधेश उपाध्याय और चतुर्वेदी जी के परिजनों आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

 

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