दतिया समेंत इन स्टेशनो से छिन सकती है ट्रेनें 

दतिया,

ग्वालियर में नागरिको ने ट्रेनों के स्टॉपेज खत्म होने से बचा लिए हैं। यहां कुछ ट्रेनों में पैंसेजर संख्या में कमी आयी है, लेकिन अधिकारियों की तरफ से उसे पास कर दिया गया। ताज एक्सप्रेस को छोड़कर डबरा में अन्य किसी ट्रेन को पर्याप्त यात्री नहीं मिल रहे हैं। यही कारण है कि यहां 7 ट्रेनों के स्टॉपेज खत्म हो सकते हैं। 

अगर दतिया की बात की जाये तो यहां तीन ट्रेनों के अलावा बाकी में हालत खस्ता है। यहां से पांच ट्रेनें छिन सकती हैं। अगर डबरा और दतिया से ट्रेनों के स्पॉपेज छिनते हैं तो वहां से ग्वालियर अप-डाउन करने वालों लोगों की मुसीबत बढ़ सकती है।

बता दें कि झांसी मंडल के अंतर्गत एक साल में करीब 300 स्टॉपेज दिए गए थे। एक साल पूरा होने के बाद झांसी में नफा-नुकसान का आकलन किया जा रहा था। 6 दिन की समीक्षा में देखा गया कि किन ट्रेनों को किस स्टेशन पर यात्री ज्यादा और कहां पर कम मिले हैं। इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार करके मंगलवार को डीआरएम को भेज दी गई है। इसमें जिन स्टेशनों से यात्री कम मिले हैं, वहां स्टॉपेज खत्म करने की अनुशंसा भी की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही रेलवे बोर्ड स्टॉपेज बहाल रखना है या नहीं इसका निर्णय लेगा। इसमें डबरा, दतिया स्टेशनों से कई ट्रेनें छिन सकती हैं।

रेलवे अफसरों की माने तो मासिक समीक्षा रिपोर्ट तैयार होती है। इसमें ट्रेन को एक महीने में एक तरफ से औसत 8 हजार यात्री मिलना ही चाहिए। दोनों तरफ से यदि 10 हजार यात्री मिलते हैं तो इसे बाउंड्री लाइन पर माना जाता है। ऐसे में रेलवे अधिकारियों की अनुशंसा महत्वपूर्ण हो जाती है। इससे ज्यादा यात्री यदि मिलते हैं तो स्टॉपेज बरकरार रखा जाता है।

मुरैना में शताब्दी का स्टॉपेज है। सूत्रों के मुताबिक यहां से ट्रेन को निर्धारित औसत से कम यात्री मिल रहे हैं। इसके बाद भी इस स्टॉपेज को बहाल रखने की अनुशंसा की गई है। ऐसे में राजनीतिक रसूख बहुत मायने रखता है। क्योंकि यदि सांसद या केंद्रीय मंत्री प्रभावशाली तरीके से स्टॉपेज बहाल रखने की डिमांड करते हैं तो फिर इसे बहाल रखने की अनुशंसा की जाती है। मुरैना में शताब्दी का स्टॉपेज बहाल रखने का भी यही कारण माना जा रहा है।