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कांग्रेस ने सेवादल की बैठक में बाँटा वीर सावरकर और आरएसएस पर विवादित साहित्य

भोपाल,

भोपाल में चल रहे अखिल भारतीय कांग्रेस सेवा दल के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर ​में बीजेपी, आरएसएस  और वीर सावरकर से जुड़े साहित्य को लेकर विवाद हो गया है. इसमें त्ैै को नाजीवादी और फासीवादी बताया गया है। इन तीनों के लिए जो लिखा गया है वो बीजेपी को नागवार गुजर रहा है. लेकिन कांग्रेस कह रही है कि यही सच है जो वो जनता को बताएगी।

बैठक में  ”वीर सावरकर कितने वीर?“ नाम जो किताब बांटी गई है उस किताब में लिखा है कि सावरकर जब 12 साल के थे तब उन्होंने मस्जिद पर पत्थर फेंके थे और वहां की टाइल्स तोड़ दी थी। यही नहीं, किताब में नाथूराम गोडसे और सावरकर के संबंधों को लेकर भी विवादित टिप्पणी की गई है।

इसके अलावा किताब में लिखा है कि सावरकर अल्पसंख्यक महिलाओं से बलात्कार करने के लिए लोगों को उकसाते थे। इसके अलावा किताब में बताया गया है कि सावरकर ने जेल से बाहर आने के लिए अंग्रेजों से लिखित में माफी मांगी है और आश्वासन दिया था कि वो दोबारा किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।

साथ ही एक ओर किताब दी गयी ”जिसका नाम आरएसएस और बीजेपी, कुछ तथ्य और जानकारी” बांटी गयी। इनमें बताया गया कि आरएसएस ने हिटलर के नाजीवाद और मुसोलिनी के फासीवाद से प्रेरणा ली है। नेताजी बोस की आजाद हिंद फौज के खिलाफ आरएसएस और हिंदू महासभा की भूमिका का भी जिक्र किया गया.वीर सावरकर के बारे में भी कई विवादित बातें लिखी गयी है। 

सेवादल की बैठक में विवादित किताब बांटने पर बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया है. बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि 'महिलाओं को तंदूर में जलाने वाली कांग्रेस से उम्मीद भी और क्या की जा सकती है'। बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा, कांग्रेस अपने लोगों को गलत जानकारी, गलत तथ्य पढ़ाती है। वो अपने लोगों को पप्पू बना रहे हैं। संघ तीस या चालीस के दशक में नहीं, 1925 में बन गया था। सभी लोगा राहुलजी की बुद्धि पर चलते है। इन्हें सही जानकारी जुटाना चाहिए।उन्होंने आगे कहा सावरकर जी का डाक टिकिट तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जारी किया था। उन्होंने सावरकर को आजादी का योद्धा बताया था।  कांग्रेस के आज के नेता अपनी नेता स्व. इंदिरा गांधी के साथ खड़े हैं। अब कांग्रेस वामपंथियों के साथ खड़ी है। ये कांग्रेस असली कांग्रेस नहीं है।

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