CDS बनते ही बिपिन रावत ने कहा बनाएंगे थिएटर कमांड्स, जानिए कैसे करेगा काम

नई दिल्ली

जनरल बिपिन रावत के रूप में भारत को पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मिल चुका है। नए साल के पहले दिन पद संभालते ही उन पर सेना के तीनों अंगों में हर स्तर पर सामंजस्य कायम करने और उनकी संयुक्त शक्ति का सर्वोत्तम इस्तेमाल करने के लिए प्रभावी प्रक्रिया की रूपरेखा तय करने की जिम्मेदारी आन पड़ी है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत अपनी तरह का विशेष थिअटर कमांड्स तैयार करेगा।

युद्ध के दौरान थिएटर कमांड्स का सबसे सही उपयोग होता है जब बात तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की होती है। युद्ध के मौके पर तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए ये कमांड बेहद उपयोगी होता है। यहां से बनी रणनीतियों के अनुसार दुश्मन पर अचूक वार करना आसान हो जाता है। यही कारण है कि सेना, वायुसेना और नौसेना को एकसाथ लाकर इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बनाने की बात हो रही है।

देश की भौगोलिक और रणनीतिक क्षेत्र को देखते हुए देश की तीनों सेनाओं और अन्य सैन्य बलों को एकसाथ लाया जाता है। इस कमांड का एक ही ऑपरेशनल कमांडर होता है। भौगोलिक क्षेत्रों का चयन इसलिए किया जाता है ताकि समान भूगोल वाले युद्ध क्षेत्र को आसानी से हैंडल किया जा सके. जैसे- हिमालय के पहाड़, राजस्थान के रेगिस्तान, गुजरात का कच्छ आदि। इस तरह का कमांड बनाना किफायती होता है। इससे संसाधनों की बचत होती है और उसका बेहतर इस्तेमाल होता है। देश में एक ही थिअटर कमांड है जिसकी स्थापना 2001 में हुई थी। इसे अंडमान और निकोबार कमांड के नाम से जाना जाता है।

अभी देश में करीब 15 लाख सशक्त सैन्य बल है। इन्हें संगठित और एकजुट करने के लिए थिएटर कमांड की जरूरत है। एकसाथ कमांड लाने पर सैन्य बलों के आधुनिकीकरण का खर्च कम हो जाएगा. किसी भी आधुनिक तकनीक का प्रयोग सिर्फ एक ही सेना नहीं करेगी बल्कि उस कमांड के अंदर आने वाले सभी सैन्य बलों को उसका लाभ मिलेगा।

पुराने सभी विभागों के प्रमुख सेक्रटरी रैंक के अधिकारी होते हैं जबकि नए रक्षा कार्य विभाग का मुखिया सीडीएस को बनाया गया है जिन्हें तीन सैन्य प्रमुखों की तर्ज पर कैबिनेट सेक्रटरी का रैंक दिया गया है। ये सभी सीधे रक्षा मंत्री को रिपोर्ट करेंगे। डिफेंस सेक्रटरी के दायरे से जिन चार तत्वों को निकाल दिया गया है, उनमें तीनों सशस्त्र सेवाएं, उनके संबंधित मुख्यालय, प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) और थल, जल एवं वायु सेना से संबंधित कार्य शामिल हैं। ये अब सीडीएस के अधीन वाले डीएमए के दायरे में आ गए हैं जिन पर आठ प्रमुख दायित्व सौंपे गए हैं।