रमेशदत्त दुबे स्मृति सम्मान आयोजन

सागर, 

देश प्रदेश के ख्यात कवि व लेखक रमेश दत्त दुबे की छठवीं पुण्यतिथि पर श्यामलम् संस्था तथा दुबे परिवार द्वारा रविवार को आदर्श संगीत महाविद्यालय में स्मृति-आयोजन किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित डॉ आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि रमेश दत्त दुबे इस अंचल के ही नहीं वरन् देश के विख्यात साहित्यकार, चिंतक और लोक जीवन के बड़े कवि थे। वे समय की पदचाप और जड़ों को पहचानने वाले व्यक्ति थे।

उन्होंने लोक के प्राणीमात्र पर अपनी लेखनी से समाज और देश के लिए दिशा प्रदान की, उन्होंने बुंदेली लोकोक्तियों का वृहद् शब्दकोश तैयार किया जिसका प्रकाशन होना चाहिए। उनका विपुल साहित्य जो अप्रकाशित है उसे भी साहित्य समाज के सामने लाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सुरेश आचार्य ने कहा कि दुबे जी के व्यक्तित्व,उनके फक्कड़पन, सादगी और वैचारिक चिंतन से साहित्य की धारा को गतिशीलता मिली। उन्होंने कहा कि दुबे जी का टोला उपन्यास सर्वश्रेष्ठ और चर्चित उपन्यास है। लोक के व्यापक धरातल पर कविता और कहानी में उनका व्यक्तित्व स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव ने अपनी व्यक्तिगत मित्रता के संस्मरण सुनाए और कहा कि दुबे जी साहित्य के बड़े कवि थे उनकी क्षमताओं के हिसाब से उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे विशिष्ट अतिथि एडिशनल कमिश्नर शिवपाल सिंह ने कहा साहित्य समाज का दर्पण होता है। जिस समाज में साहित्य नहीं होगा वह समाज मूल्यविहीन हो जाता है।

कार्यक्रम में कवि कथाकार डॉ.राजेश दुबे को "रमेश दत्त दुबे साहित्यकार सम्मान 2019" से सम्मानित किया गया। श्यामलम् संस्था के सचिव कपिल बैसाखिया ने सम्मान पत्र तथा सह-सचिव संतोष पाठक ने जीवन परिचय का वाचन किया।

डॉ. राजेश दुबे ने उक्त सम्मान को स्वयं के लिए सौभाग्य बताते हुए कहा कि स्वर्गीय रमेश दत्त जी की प्रेरणा से ही मेरे लेखन में कविता और व्यंग्य जन्मा जिसके लिए मैं सदैव ऋणी रहूंगा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ.महेश तिवारी ने कहा कि दुबे जी वाचक परंपरा के व्यक्ति थे। उनका गांधीवादी जीवन, आचरण उनकी कविताओं में सहज ही दिखाई देता है। उन्होंने कविता को न केवल लिखा बल्कि जिया भी। कार्यक्रम में "रमेश दत्त दुबे साहित्यकार सम्मान" से पूर्व वर्षों में सम्मानित डॉ. वेद प्रकाश दुबे और डॉ. आशुतोष मिश्र ने भी अपने विचार रखे।

इस अवसर पर लोक गायक शिवरतन यादव ने स्वर्गीय दुबे के प्रिय कवि ईसुरी की चौकड़िया  तथा शिक्षक राजेंद्र सेन ने दुबे जी के व्यक्तित्व पर आधारित गीत का सस्वर गायन किया। स्वर्गीय दुबे के पुत्र अभिनव दत्त तथा असीमदत्त, हरिसिंह ठाकुर, हरी शुक्ला व कुंदन पाराशर ने पुस्तकें भेंटकर अतिथियों का स्वागत किया। स्वर्गीय दुबे की धर्मपत्नी श्रीमती मदन कुमारी दुबे ने आभार प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम में नगर के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में शामिल रहे जिनमें शिव‌शंकर केशरी,डॉ.उदय जैन,डॉ.कविता शुक्ला, डॉ.गजाधर सागर,मदन चौरसिया,डॉ.दिनेश अत्रि,डॉ राजेंद्र यादव,हेमचंद जैन, राजेंद्र दुबे, अब्दुल रफीक गनी, मुन्ना शुक्ला, राजेश शास्त्री, डॉ.अनिल जैन, अमित आठिया, डॉ.एम के खरे,एम शरीफ, के.एल तिवारी अलबेला, अमित मिश्रा, रामरतन चौरसिया, महेश केसरवानी, कृपाशंकर पांडे, तारिक खान, राजेंद्र चढ़ार, प्रताप ठाकुर, धर्मेंद्र साहू, प्रदीप वर्मा, भगवान दास तोमर, रविन्द्र खाटोल, मनोज रैकवार, आबिद खान, कल्पना ठाकुर, काशीराम अबोध, चांदनी कुशवाह, पूजा मौर्य, मोनिका यादव, मोनिका जाटव आदि के नाम शामिल हैं।