निरंकारी मिशन चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला हैः अमन महेन्द्रु

बाँदा,

संत निरंकारी सत्संग भवन बाँदा में इंग्लिश मीडियम समागम का आयोजन किया गया। समागम में आगरा के निरंकारी संत अमन महेन्द्रु ने सत्संग की महिमा का वर्णन करते हैुए कहा कि सत्संग में जाने से ईश्वर की याद आती है। ईश्वर की याद से विचार फिल्टर होते हैंए विचार ही कर्म का आधार बनते हैं अर्थात् सत्संग, सेवा, सिमरन से चरित्र निर्माण होता है। इसीलिए निरकारी मिशन को चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला कहा गया।  

उन्होने कहा की कर्म ही इंसान की शोभा बढ़ाते हैं। जैसे पानी का काम है प्यास बुझानाए सूर्य का काम है तपिश देना, ऐसे भक्त का काम है अच्छे गुणों व कर्मों से भरपूर होना। गुणहीन व कर्महीन भक्त नहीं हो सकता है। भक्त हर समय और हर जगह एक जैसा व्याहार करते है अर्थात भक्त अपनी वाणी व कर्म से सबको ठंडक देते है।

विभिन्न ब्रांचों से पधारे बच्चों ने अंग्रेजी भाषा का सहारा लेकर ग्रुप सांग, अवतारवाणी, हरदेव, वाणी, कविता, गीत व विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि ईश्वर एक है जो सर्वव्यापी अविनाशी और निराकार है तथा इसे जानना हर मानव का प्रथम कर्तव्य है। ईश्वर नहीं तो शान्ति नहीं, ईस्वर को जानना शान्ति को पाना है, यह दर्शन ही सन्त निरंकारी निशन का वास्तविक स्वरूप है। अंग्रेजी भाषा का सहारा लेकर जन जन तक निरंकार परमात्मा के ज्ञान को पहुँचाया जा सकता है तथा विश्व समाज में व्याप्त दीर्घ आक्रोश और हिंसा को समाप्त कर एकत्व व विश्व बन्धुत्व को कायम किया जा सकता है। यही निरंकारी मिथन व सन्त् समागम का लक्ष्य है।

इस सन्त समागम में लगभग 300 बच्चों ने प्रतिभाग किया। समागम में बॉदा के अलावा बबेरू, अतर्राए चित्रकूट धाम कर्वी, महोबा तथा कमासिन के निरंकारी, सुन्तों ने भाग लिया।