नदी नारी नीर सम्मेलन में लोगों से भाग लेने का आवाहन

चित्रकूट,

आज कामदगिरि प्रमुख द्वार में बैठक आयोजित की गई, बैठक में प्रमुख रूप से बुंदेलखंड प्रांत स्तर के जनसंवाद हेतु  नदी नारी नीर  सम्मेलन 12 दिसंबर 2019  हेतु  चित्रकूट जनपद वासियों, सामाजिक कार्यकर्ता, जल /पर्यावरण पर काम करने वाले  पर्यावरणविद ,संत, समाज तालाब/नदी पर आश्रित समुदाय आदि के लिए आवाहन किया गया कि नदी नारी नीर राष्ट्रीय सम्मेलन  2019 में सम्मिलित हो।

नदी नारी नीर  सम्मेलन कार्यक्रम के  संयोजक रामबाबू तिवारी ने कहा कि आज वर्तमान में जल के प्राकृतिक स्रोत छोटी नदी या तालाब विलुप्त हो जा रही हैं इनको बचाने हेतु समाज को जल के प्राकृतिक स्रोत तालाब, पोखर, झील, कुआं नदी आदि  से जुड़ना होगा एवं नदी के संरक्षण हेतु संत- समाज, नदी  किनारे गांव को आगे आना होगा एवं समाज के साथ ही साथ शासन की मदद लेते हुए जल के प्राकृतिक  को बचाना होगा यह नदी, नारी, नीर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है  बुंदेलखंड को आकाल  एवं दुष्काल से मिटाने  हेतु  बुंदेलखंड  में जल साक्षरता हेतु एक जनांदोलन का रूप यह सम्मेलन लेगा लोगों को जल के प्राकृतिक स्रोतों से जोड़ने का कार्य यह सम्मेलन करेगा।

स्वामी मदन गोपाल दास जी ने कहा की पहले घर गांवो की सभ्यता और संस्कृति की पहचान तालाबों से होती थी अब हम इनके उस महत्व को नहीं समझते। हम दुनिया के भाग्यशाली देशों में से एक हैं जहां इन्द्रदेव की कृपा होती है लेकिन हम इसका 15 फीसदी से ज्यादा उपयोग नहीं कर पाते और इसके उपयोग में सबसे बड़ी भागीदारी इसी में थी कि घर गांव के तालाबों में उस पानी को संचित किया जाता। हमारे लिये बड़े विकल्प के रूप में पानी के संकट के बीच में सबसे बड़े समाधान के रूप में निश्चित रूप से सबसे पहले तालाब ही आयेंगे। क्योंकि इनका एक मात्र योगदान अपने चारों तरफ के गांवों को पानी उपलब्ध कराना ही नहीं है बल्कि साथ में भूमिगत जलभिदों को पानी उपलब्ध कराना भी है जो कुओं व बावड़ियों में भी पहुंचता है।

प्रो विवेक पटेल जी ने कहा की जीवन की उत्पत्ति ही पानी से हुई है इसके बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है लेकिन आज दुनिया की सारी नदियां संकट में हैं। हमारे देश की कोई भी नदी ऐसी नहीं जिसे स्वस्थ व स्वच्छ कहा जा सके। विदेशों में इस संकट को दूर करने की दिशा में कारगार कदम उठाये जा रहे हैं पर हमारे देश में तो इस मुद्दे पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई देती। अब भी समय है कि सामूहिक भागीदारी व सामाजिक जागरूकता से हम नदियों की बिगड़ती सेहत को सुधारने की पहल करें वर्ना हमारे पाप धुलने तो दूर दो बूँद पानी को भी तरस जायेंगे।

आज की बैठक में प्रमुख रूप से धर्मेंद्र, बृजेंद्र,  स्वामी हनुमान दास जी,स्वामी  बालक जी महाराज, संदीप, अश्वनी अवस्थी,अरविंद, ज्ञानेंद्र, ज्ञान प्रकाश पटेल, रोहित, विनोद, सुनील वर्मा जाग,राखी,जानकी,स्वेता,आदि।।