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वाहनों की गाइड लाइन का करे पालन, होगी कार्रवाई

जालौन, 

डीएम डा. मन्नान अख्तर एवं एसपी डा. सतीश कुमार ने राजकीय मेडिकल कालेज के सभागार में स्कूल संचालकों व प्रधानाचार्यों के साथ बैठक कर कहा कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संचालकों की है। लिहाजा स्कूलों से खटारा वाहन हटाएं और किसी भी स्कूली वाहन में बच्चे ओवरलोड न दिखाई दें। जल्द ही अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की चेकिंग की जाएगी। जिस किसी भी वाहन में कमी पाई जाएगी, उस स्कूल के संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्कूली वाहनों और बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बता दें कि हाल ही में दो तीन स्कूलों के वाहन हादसों का शिकार हुए हैं। जिनमें स्कूली बच्चों को भी चोटें आई हैं। इस पर ही अंकुश लगाने के लिए पुलिस व प्रशासन ने बैठक आयोजित की थी। जिसमें डीएम ने कहा कि स्कूल प्रबंधन चाहे निजी वाहनों से बच्चों को लाते हो या प्राइवेट तौर पर ठेके पर बच्चों का लाने का काम कराते है, दोनों में जिम्मेदारी स्कूली प्रबंधन की ही है। वाहन चालकों की स्वास्थ्य जांच और वाहन चालक परिचालक की ड्रेस दी जाए। ड्रेस के साथ नाम और फोन नंबर की नेमप्लेट भी दी जाए। सरकार ने जो स्कूली वाहनों के मानक निर्धारित किए है, उनका पालन किया जाए।

स्कूली टैक्सी के ऊपर तिरपाल की जगह स्टील की चद्दर लगाई जाए। उन्होंने एआरटीओ को निर्देश दिया कि बिना मानक के कोई भी स्कूली वाहन सड़क पर न दिखाई दें। एसपी डा. सतीश कुमार ने कहा कि पिछले दिनों जालौन रोड पर हुए स्कूली बस के हादसे को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। अब प्रशासन दूसरी ऐसी घटना बर्दाश्त नहीं करेगा। बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सीओ ने कहा कि बच्चा किसी परिवार का हिस्सा नहीं बल्कि देश का भविष्य है। उसे सुरक्षित घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी स्कूली प्रबंधन की है।

एआरटीओ प्रशासन सोमलता यादव ने कहा कि स्कूली वाहनों की स्पीड 40 किलोमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग यंत्र (जीपीएस) व सीसी कैमरे लगे होने चाहिए। बालिका बस में एक महिला परिचारक भी होनी चाहिए। बस की फिटनेस भी समय पर पूरी होनी चाहिए। जांच के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर वाहन चालक व स्वामी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डीआईओएस भगवत पटेल ने कहा कि स्कूल वाहनों से होने वाले हादसे शू्न्य करने की जरूरत है। वाहनों से संबंधित जरूरतों को समयानुसार पूरा करें। स्कूली वाहनों की फिटनेस की जांच के लिए जिला प्रशासन के साथ शिक्षा विभाग भी अभियान चलाएगा। स्कूल संचालन या स्कूली वाहनों के संचालन में गड़बड़ी मिलने पर मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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