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राम और भरत मिलन सुन विव्हल हुए श्रोतागण

@राजकुमार याज्ञिक, चित्रकूट

भगवान श्रीराम की साधना स्थली पवित्र भूमि चित्रकूट के प्रमोद वन स्थित दास हनुमान मंदिर में काशी से आए संजय कनौरिया परिवार से आयोजित रामकथा के छठवें दिन कथा व्यास पंडित श्रीकांत शर्मा ने राजा दशरथ के प्राण त्यागने के बाद भरत को ननिहाल से बुलाए जाने से लेकर चित्रकूट में राम भरत मिलन और भरत को चरण पादुका प्रदान कर अयोध्या का राजपाट संभालने तक की कथा का मार्मिक वर्णन किया।

कथा व्यास श्रीकांत शर्मा ने रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास की चैपाइयों और दोहों के माध्यम से दिए गए संदेशों को विस्तार करते हुए समझाया कि कलयुग में मन से किए गए पवित्र कर्मों का भी पुण्य फल मिलता है। साधना भजन करने से व्यक्ति अपने सूक्ष्म शरीर को भी देख सकता है। शरीर द्वारा की गई सेवा शरीर छूटने के साथ ही छूट जाती है, लेकिन मन से की गई सेवा कभी नहीं छूटती। कथा व्यास ने भगवान राम की मानसिक सेवा को सर्वश्रेष्ठ सेवा बताया। अगर शरीर से सेवा न हो सके या शरीर साथ न दे तो इंसान को अपने मन से भगवान की सेवा करनी चाहिए। मन से ही बद्रीनाथ, केदारनाथ जाइए, चित्रकूट चले आइए भगवान की आरती करिए पूजा करिए उन्हें भोग लगाइए।

भगवान इंसान द्वारा की गई मानसिक सेवा पूजा को भी स्वीकार करते हैं। भक्तमाल में ऐसे कई उदाहरण हैं। जिन भक्तों ने मन से भगवान की सेवा की भगवान उनके सामने प्रकट हो गए। संसार और भगवान में अंतर बताते हुए कथा प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा जी ने कहा कि दुनिया को तन चाहिए और धन चाहिए लेकिन भगवान को न तो तन चाहिए और न ही धन, उन्हें तो सिर्फ पवित्र मन चाहिए। भगवान भाव के भूखे हैं अगर व्यक्ति अपना मन ईश्वर को समर्पित कर दे तो उसके जीवन में फिर कोई कष्ट नहीं रह जाता। राम और भरत मिलन प्रसंग सुनकर काशी से आये कथा आयोजक संजय कनौरिया, मुदित कनौरिया परिवार सहित कथा में आये श्रद्धालु भाव विह्वल हो उठे। 
 

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