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आम जन की गूंज वर्षों की इच्छा पूरी हुई

@सौरभ चन्द्र द्विवेदी, चित्रकूट  

नेताओं की बात और है पर जनता के मन से एक बात सबसे अधिक उभर कर आ रही है कि वर्षों की इच्छा पूरी है। यह वर्षों की दबी हुई इच्छा अब जन्म लेकर प्रकट हुई है। यह जन भावनाएं हैं जो अपने आराध्य श्रीराम के लिए मन ही मन निरंतर प्रवाहित होती रही हैं। आजादी के सत्तर साल और इससे पूर्व का यह विवादित मसला जब न्याय के मोड पर आया तब भी कुहरा छंटा नहीं था। 

 

एक समय ऐसा भी लगता रहा कि शायद यह मुद्दा अभी और सैकड़ो वर्ष घसीटता जाएगा। हाईकोर्ट से निर्णय के बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहा। जनता लगातार सरकार से मांग करती रही कि राम मंदिर बनाया जाए परंतु इस देश के हिन्दू - मुसलमान में आम सहमति कभी नहीं बन सकी। 

 

मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा तो लोगों में उम्मीद जगी कि अब इसके आगे क्या ? यह भारत की सर्वोच्च पटल है, जिसके बाद समस्त आशंकाओं का अंत हो जाता है। सिवाय पुनर्विचार याचिका दायर करने के, जबकि ऐसा किया जाना भी उचित नहीं होगा। चूंकि इससे देश की रफ्तार रूकती है। अब हिन्दू - मुसलमान को समझना चाहिए और न्याय की अंतिम मुहर मानकर तटस्थ भाव से आगे का सफर शुरू किया जाना चाहिए। 

 

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में ना किसी की हार हुई ना किसी की जीत, यह सिर्फ और सिर्फ भारतीयता की जीत है। दोनों पक्ष को निर्णय स्वीकार कर विश्व में भाईचारे का संदेश देना चाहिए। यह अवसर है देश की एकता - अखंडता का सांकेतिक परचम लहराने का। उन लोगों से परहेज करने की वैसे ही जरूरत है जैसे बीमार होने पर डाक्टर कुछ खाने - पीने के लिए परहेज बता देते हैं। भड़काऊ बाते करने वालों से भी उम्मीद है कि वे समरसता की बात करें ताकि इससे आगे बढ़कर राष्ट्रीय उन्नति और वैभव के लिए काम किए जा सकें। उलझाने से अधिक सुलझाना महत्वपूर्ण होता है। 

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