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संकल्प में होती है तूफान से जूझने की ताकत: शर्मा

@राजकुमार याज्ञिक, चित्रकूट

भगवान श्रीराम की लीला स्थली के रूप में सुविख्यात ऋषि मुनियों की अनादि तपस्थली चित्रकूट में 6 से 14 सितम्बर तक राम कथा मर्मज्ञ श्रीकांत शर्मा की संगीतमयी राम कथा का शुभारम्भ विधिविधान के साथ वेदमंत्रों के उच्चारण से हुआ। 

राम कथा के पहले दिन राम चरित मानस की रचना कर घर घर राम चरित्र पहंुचाने वाले गोस्वामी तुलसी दास का जीवन परिचय बताते हुए कथा व्यास श्रीकांत शर्मा ने कहा कि चित्रकूट जनपद के राजापुर गाँव में मूल नक्षत्र में बालक तुलसी का जन्म हुआ था। तुलसी के जीवन के प्रसंग से श्रोताओं को संकल्प की शक्ति के बारे में बताते हुए कहा कि जीवन में जब तक संकल्प नहीं होता तब तक कोई काम नहीं बनता। सबसे ज्यादा ताकत मनुष्य के संकल्प में होती है। तूफ़ान से जूझने का संकल्प करने वालों को समुद्र भी रास्ता दे देता है। राम कथा के प्रारंभ में कथा व्यास श्रीकांत शर्मा ने हनुमान के बल और उनकी शक्ति के बारे में बताया।

कलयुग में हनुमान की कृपा से तुलसीदास को इसी चित्रकूट में भगवान् राम और लक्ष्मण के दर्शन हुए थे। हनुमान की ही प्रेरणा से तुलसीदास ने राम कथा लिखने की शुरुआत अयोध्या से की थी। तुलसी दास ने 12 ग्रन्थ लिखे और इन्हीं की प्रेरणा से सबसे पहले काशी में राम लीलाओं का मंचन प्रारंभ हुआ। वाणी की ताकत और उसके प्रभाव की चर्चा करते हुए राम कथा के आचार्य श्रीकांत शर्मा ने कहा कि एक गलत वाणी भविष्य का नाश कर सकती है। गलत वाणी बोलने वाले भी कष्ट पाते हैं और जिसके लिए गलत वाणी का प्रयोग किया जाता है वह तो दुखी होता ही है। श्रद्धा और विश्वास की महत्ता प्रतिपादित करते हुए कहा कि तुलसीकृत रामचरित मानस श्रद्धा और विश्वास रखने वाले मनुष्यों को सब कुछ देता है। विश्वास सब पर किया जाता है लेकिन श्रद्धा किसी एक पर ही होती है। 
 

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