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जिलाधिकारी ने बैठक में दिए निर्देश 

@अनिल सिंह आवारा, बांदा

पशुओं को खुला छोड़ने पर होगी मालिक को जेल

जनपद स्तरीय अनुश्रवण, मूल्याकंन एवं समीक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी हीरा लाल ने सभी उप जिलाधिकारियों, विकास खण्ड अधिकारियों एवं सभी ई0ओ0 को निर्देश दिये कि क्षेत्रों में विजिट करअन्ना पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाए। दो दिन के अंदर सड़क पर मिलने वाले सभी पशुओ को गोशालाओं में बंद करे। यदि किसी पशु मालिक के द्वारा अन्ना पशुओं को छोडते पाया जाए तो कानूनी कार्यवाही कर जेल भेज दिया जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि बुन्देलखण्ड में अन्ना प्रथा एक अभिशाप है इसे वरदान में बदलने के लिए जनसामान्य को जागरूक होना पडेगा। बेसहारा पशुओं को आश्रय देना पडेगा तभी कुछ कल्याण इस जिले का हो सकता अन्यथा नही। अन्ना पशुओं से जान-माल का नुकसान, सडक दुर्घटना, फसल की बर्बादी से कम उत्पादता में वृद्धि होना इत्यादि समस्यायें हैं।

उन्होंने कहा कि पहले महिलायें गोबर से पूरे घर की लिपाई-पोताई करती थी जो कि घर की हवा को शुद्ध रखने का कार्य करता है। गाय के गोबर से बायो गैस, बर्मी कम्पोस्ट, गौ मूत्र को इकट्ठा कर मार्केट में बेचना तथा कीटनाशक दवाइयां भी तैयार करना आदि विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं। हमारे हिन्दू धर्म में शास्त्रों के अनुसार गाय को गौमाता का दर्जा दिया गया है यदि इस माॅ को पीडा पहुंचेगी या भूख, प्यास से मृत्यु होगी तो कैसे लोंगो का कल्याण हो सकता है। इसी सबको दृष्टिगत रखते हुए अब अन्ना प्रथा को समाप्त करना ही होगा जिससे किसानों की फसलों को होने वाले नुकशान से बचाया जा सके और जनपद विकास पथ की ओर अग्रसर हो सके। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चन्द्र वर्मा, डीआरडीए मनरेगा पीडी आरपीमिश्र, मुख्य कोषाधिकारी विनोद बाबू, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा0 ईश्वर नरायण सिंह, उप जिलाधिकारी पैलानी मंसूर अहमद, जिला पंचायत राज अधिकारी संजय यादव सहित समस्त जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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