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यमुना नदी में बाढ़ आ जाने "/>

बाढ़ से निपटने को डीएम ने कसे अफसरो के पेंच

बांदा,

यमुना नदी में बाढ़ आ जाने से हो रही तबाही से प्रशासन गहरी नींद से जाग गया हैं। गुरूवार को बाढ़ स्टीयरिंग की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष हुई। जिसमें जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ जिलाधिकारी हीरा लाल ने समस्त उप जिला अधिकारियों को निर्देशित करते देते हुय कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ से प्रभावित गांवों में पंहुचकर राहत कैम्प एवं बाढ़ चौकियों का संचालन करें। तथा अन्तर्जनपदीय नाव एवं मोटर वोट की व्यवस्था करके तथा बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों की सूची प्राप्त कर उन्हें शासन से मिलने वाली सुविधाओं मुहैय्या करायें।

उन्होनेें अधिशासी अभियंता विद्युत को निर्देश दिये कि बाढ़ प्रभावी क्षेत्रों का दौरा कर विद्युत लाइन को ठीक रखना तथा ढीले-ढाले तारों को ठीक करवाने का कार्य करें और बाढ के समय जल भराव वाले क्षेत्रों से तत्काल विद्युत विच्छेदन की व्यवस्था भी की जाए जिससे होने वाली दुर्घटना को बचाया जा सके। उन्होंने अधिशासी अभियंता जल संस्थान एवं जल निगम को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी लोग अपनी टीम के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पेयजल की व्यवस्था करें एवं बाढ़ के उपरान्त हैण्ड पम्पों के पानी की जांच एवं उन्हें ठीक कराकर पीने योग्य पानी की व्यवस्था की जाये। उन्होंने समस्त अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वर्षा के समय कूड़े के ढेरों को शीघ्र उठवाये और बाढ़ चौकियों पर सफाई एवं प्रकाश की व्यवस्था भी करायें।

जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि जितने भी डाक्टर्स हैं उन सभी की टीम गठित कर अलग-अलग बाढ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें साथ ही बाढ़ चौकियों पर लगाये गए स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थित भी सुनिश्चित की जाये। बाढ़ के समय एवं बाढ़ के उपरान्त आवश्यक टीकाकरण एवं कीटनाशक दवाईयों का छिड़काव भी कराने की व्यवस्था कराये। जिससे मलेरिया, चिगनगुनियां, संचारी रोग आदि होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके।

उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि बाढ़ के समय पशुओं को चारे एवं भूसे आदि की व्यवस्था करायें और पशुओं को टीकाकरण की व्यवस्था भी करायी जाए। उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि बाढ़ चौकियों पर उचित दर विक्रेताओं को सम्बद्ध करें एवं बाढ़ के समय लाई, चना, गुड, माचिस आदि का स्टाक भी चिन्हित कर सुरक्षित करेंगे। मिट्टी का तेल, डीजल, पेट्रोल का स्टाक भी सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने अधिशासी अभियंता सिंचाई को निर्देशित करते हुए कहा कि बाढ़ के समय केन नहर द्वारा कन्ट्रोल रूम की स्थापना की जाए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चन्द्र वर्मा, अपर जिला अधिकारी संतोष बहादुर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संतोष कुमार, नगर मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार, समस्त उप जिला अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक विनोद कुमार, बेसिक शिक्षाधिकारी हरिश्चन्द्र नाथ, अपर जिला सूचना अधिकारी कु.शारदा सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
 

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