< घाट बदहाल, कहां होगा पुरखों का तर्पण Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News झाँसी,

पितृपक्ष 13 सितंबर से शु"/>

घाट बदहाल, कहां होगा पुरखों का तर्पण

झाँसी,

पितृपक्ष 13 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। इसके साथ ही पूर्वजों को तर्पण देना शुरू हो जाएगा। तर्पण जलाशयों के किनारे घाटों पर किया जाता है। लेकिन, इन दिनों घाटों की स्थिति बदहाल है। ऐसे में तर्पण कहां होगा, इसे लेकर लोग परेशान हैं। सभी मत एवं संप्रदायों में पूर्वजों को याद करने के लिए विभिन्न विधान है। हिंदू धर्म में भी पूर्वजों को नमन एवं तर्पण करने के लिए भाद्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से 15 दिन का पितृ पक्ष शुरू होता है।

इसमें सभी लोग अपने पुरखों को जलाशयों के किनारे घाटों पर जल का तर्पण करते हैं, जिसका व्यापक धार्मिक महत्व है। लेकिन, महानगर में पानी वाली धर्मशाला, सीपरी का आल्हा घाट सहित अन्य जलाशयों में पसरी गंदगी और जल कुंभी से स्थिति बदहाल हो चली है। लक्ष्मी तालाब के विकास कार्य होने से भूतनाथ मंदिर के समीप होने वाला तर्पण का कार्य भी इस साल लोग नहीं कर पाएंगे।

उल्लेखनीय है कि पानी वाली धर्मशाला में दो साल पहले ही 20 लाख रुपये नगर निगम ने सफाई के नाम पर खर्च किए थे। लेकिन वर्तमान में इसकी हालत और भी ज्यादा खराब हो गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक धर्मशाला के पानी में अब तो खडे़ भी नहीं हो सकते हैं।

इसका बेहद गंदा पानी लोगोें को जल्द बीमार कर सकता है। इधर आल्हा घाट में आवास विकास, नंदनपुरा, सीपरी सहित कई इलाकों के लोग तर्पण के लिए जुटते हैं। लेकिन यहां फैली जलकुंभी और गंदगी से आम लोग हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए आस पास के बच्चों ने जलकुंभी हटायी। नगर निगम के कर्मचारी सिर्फ देख कर ही चले गए थे।

अन्य खबर

चर्चित खबरें