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नम आंखों के साथ कर्बला में ताजिये, ढालें सुपुर्दे खाक की गईं

बांदा, 

इमाम हुसैन की याद में मनाए जाने वाले मोहर्रम पर्व का आज सम्पन्न हो गया। मोहर्रम का पर्व यूँ तो पूरी दुनियां में मनाया जाता है। लेकिन बांदा में इस पर्व का अपना अलग रंग देखने को मिलता है। यहाँ लोग जात पात भेद भाव धर्मवाद से ऊपर उठ कर इस पर्व में भाग लेते हैं।

मुस्लिम मंदिरों की आरती में दिखाई देते है, तो हिन्दू इमामबाड़ों में, ये सदभाव सदियों से बांदा जनपद को अपने आप मे सब से अलग पहचान देता चला आरहा है। मंगलवार को मोहर्रम की दसवीं मनाई गई, शहर के लगभग 150 इमामबाड़ों से ताजिये, ढालें, नालें, मातमी धुनों के साथ उठाई गईं। जो अपने अपने रास्तों होते हुए कर्बला कर्बला पहुंची कर्बला में ताजिये और ढालें कर्बला के मौदान में सुपुर्दे खाक की गई।

कर्बला के रास्तों में और कर्बला में ताजिये ढाल देखने वालों का जन सैलाब उमड़ पड़ा। इससे पूर्व नौ तारीख की रात शहर के इमाम बाड़ों में खासी रौनक देखने को मिली इमाम बाड़ों में फातेहा दिलाने और मन्नत मांगने, मन्नत पूरी होने पर चांदी के नीबू, चांदी के चाँद आदि चढाने वालों का तांता लगा रहा।

सबसे ज्यादा भीड़ रामा जी के इमामबाड़े में देखने को मिली रामा जी की ढाल पर चांदी के नीबू, फूल मालाएं चढाने और मन्नत मांगने और मन्नत मूरी होने पर अपनी श्रद्धा अनुसार चढावा चढाने आने वालों में हिंदुओं की संख्या इस बात का सुबूत थी के इमाम हुसैन किसी एक धर्म एक समुदाय के नहीं है बल्कि जो भी सच्चे दिल से उन्हें मानता है वो उसके हैं।

इससे पूर्व नौंवी की रात इमाम हुसैन के चाहने वालो ने आग का मातम किया। शहर भर के इमाम बाड़ों में अलाव जलाये गए।  जब अलाव अंगारों से भर गए तब ये हुसैनी अकीदत मन्द इन अंगारों से भरे अलाव में कूद कर अपने हाथों में अंगारे भर भर कर उछालते रहे, जिसे लोग हैरत भरी नगाहों से देखते रहे।

अलाव खेलने के बाद ढाल सवारियां उठाई गईं जो रात भर शहर में घूमती रही, पूरी रात जगह जगह लोगों ने इन हुसैनी अकीदत मंदों के लिए लंगर का आयोजन किया किसी ने कॉफी किसी ने चाय, कहीं बिरयानी, पुलाव, कहीं आइसक्रीम कोल्ड ड्रिंक, आदि के लंगर हुए। मोहर्रम का पर्व का तो समापन्न तो हो गया लेकिन जाते जाते ये पर्व लोगों के अंदर भाई चारा, और आपसी सौहार्द को नई ताज़गी दे गया।

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