आईना बनके गुजारी है जिंदगी मैंने, टूट जाऊगा बिखरने से....

महोबा, 

कजली महोत्सव की चौथी शाम कवियों के नाम रही। कवियों ने रचनाएं सुनाकर समा बांध दिया। एक के बाद एक कवियों द्वारा पेश की गई रचनाएं सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। मोदी जी के नारे का कटाक्ष करते हुए हास्य कवि ने व्यंग्य सुनाया ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा तो शौचालय की क्या जरूरत है’ जैसे कई जोक सुनाकर लोगों को खूब गुदगुदाया। अलीगढ़ के कवि विष्णु सक्सेना की रचना ‘आइना बनके गुजारी है जिंदगी मैंने, टूट जाऊंगा बिखरने से बचा लो मुझको’ की खूब सराहना हुई। कीरत सागर सांस्कृतिक मंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का सोमवार की रात को आयोजन किया गया।

कवि सम्मेलन का उद्घाटन डीएम अवधेश तिवारी, एसपी स्वामीनाथ, नगर पालिका अध्यक्ष दिलाशा सौरभ तिवारी, अधिशासी अधिकारी एलसी सरोज, भाजपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सेंगर, पूर्व जिलाध्यक्ष चक्रपाणि त्रिपाठी ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इसके बाद कवियों ने रचनाएं सुनाईं। कवि डॉ. कीर्ति काले ने 70 सालों के प्रश्नों का उत्तर दे दिया मोदी जी, काम न कोई जो कर पाया वो काम कर दिया मोदी जी। 370 टांकों को गलने में वक्त लगेगा, पाक समर्थक कीड़ों के बस इन्फेक्शन से बचना है कविता पढ़ी। आंखों में फागुन की मस्ती, पलकों में बसती हलचल, मतवाला मन भीग रहा फूलों के त्योहार में, शायद ऐसा ही होता है पहले-पहले प्यार में सुनाकर मनोरंजन कराया।

हास्य कवि हरेश चतुर्वेदी आगरा ने मोदी जी से लेकर तमाम नेताओं पर कटाक्ष कर खूब हंसाया। कवि तुसा शर्मा मेरठ ने रचना पढ़ी ‘ये प्यार तेरा मुझ पर कुछ जादू कर देगा, जो कमी है जीवन में उसको भर देगा’... ‘तेरी याद है मेेरा हौसला मुझे इस जमाने का डर नहीं, मैं तेरी खुशी में शरीक हूं जिसका मुझे कोई गम नहीं...’। कवि डॉ. कुंवर बेचेन गाजियाबाद ने ‘दिल पे मुश्किल है बहुत दिल की कहानी लिखना, जैसे बहते हुए पानी पे पानी लिखना...’। शाख से तोड़े गए फूल ने ये हंस के कहा, अच्छा होना भी बुरी बात है इस दुनिया में रचना सुनाकर खूब तालियां बटोरी। संचालन शशिकांत यादव देवास ने किया। आयोजक पीयूूष नगायच रहे। हास्य कवि अशोक सुंदरानी, अनिल तेजस्व, कैलाश मंडेला, कमलेश शर्मा ने भी रचनाएं सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।