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कांग्रेस कन्फ्यूज है या जनता को कन्फ्यूज कर रही है

कांग्रेस कन्फ्यूज है या कांग्रेस जनता को कन्फ्यूज कर रही है। इस वक्त एक बड़ी बात निकल कर सामने आ रही है कि भारत की बहुसंख्यक जनता जम्मू-कश्मीर को लेकर जितना सकारात्मक सोचती है उससे उलट तस्वीर है। जो कुछ भी कांग्रेस के नेता बयान दे रहे हैं उससे यही प्रतीत होता है कि हमारा दिल - दिमाग बड़ा निम्न स्तर का है और कांग्रेसियों का दिल - दिमाग वैश्विक स्तर से भी उच्च स्तर का है ! 

 

वजह साफ है कि जम्मू-कश्मीर मामले पर अब तक वैश्विक स्तर से रत्ती भर का नकारात्मक बयान किसी देश के राजनयिक का नहीं आया। एक पाकिस्तान के अतिरिक्त समूचा विश्व इसे भारत का आंतरिक मामला कह कर  अधिक तूल नहीं दे रहा। 

 

कोई अगर छटपटा रहा है तो वह पाकिस्तान है। ऐसी ही समानांतर छटपटाहट कांग्रेस के नेताओं में दिख रही है। पी. चिदंबरम ने हिन्दू-मुस्लिम का राग अलाप कर धार्मिक दृष्टिकोण प्रदान करने की कोशिश की तो वहीं दिग्विजय सिंह ने भी कहा कि सावधान नहीं तो जम्मू-कश्मीर हाथ से निकल जाएगा ? 

 

स्वयं राहुल गांधी ऊलजलूल बयान देकर ना जाने क्या साबित करना चाहते हैं ? जबकि यह वक्त है कि जम्मू-कश्मीर के हालात अधिक अच्छे हों और इसके लिए देश प्रेम की भावना से साथ मिलकर काम किए जाने की आवश्यकता है। जिसकी संभावना नजर नहीं आ रही! 

 

जम्मू-कश्मीर कौन ले जाएगा ? पाकिस्तान ले जाएगा शायद यही कहना चाहते हैं कांग्रेसी। जो पाकिस्तान छटपटा रहा है, उसे समझ नहीं आ रहा कि क्या करे और क्या ना करे ? उसे अगर कोई राहत और साहस प्रदान करता नजर आ रहा है तो कांग्रेस और कुछ विपक्षी नेता ! अन्यथा वैश्विक बिरादरी से भी पाकिस्तान निराश हो चुका है। 

 

कांग्रेस की मानसिकता समझ पाना बड़ा मुश्किल हो रहा है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह होते हैं। चुनाव के समय हर तरह के वाद - प्रतिवाद का विमर्श खुले मंच पर होता रहा है और होना चाहिए। परंतु जम्मू-कश्मीर के मामले पर सलमान खुर्शीद से लेकर किसी भी विपक्षी नेता का बयान समझ में नहीं आ रहा है। कुछ नेताओं को समझ आ चुकी है तो वह सरकार की समालोचना कर निर्णय के पक्ष मे हैं। 

 

किन्तु राहुल गांधी से लेकर कांग्रेस के मुख्यधारा के नेता पाकिस्तान जैसे बयान देते नजर आ रहे हैं। हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति स्वयं करते नजर आ रहे हैं। यह समझ नहीं आ रहा कि देश भर में कांग्रेस को इससे क्या लाभ होगा ? मुझे मेरी मानसिक स्थिति के अनुसार कांग्रेस को हानि के सिवाय कुछ नजर नहीं आता। भय सिर्फ इतना सा है कि कहीं कांग्रेस 1984 जैसा दंगा करवाने की फिराक मे तो नहीं है ! जिस प्रकार के बयान आ रहे हैं , उससे यही समझ मे आ रहा है कि कांग्रेस चाहती है कि कुछ भी हो जाए। निश्चित रूप से कांग्रेस को यह आभास हो रहा है कि उसकी राजनीतिक जमीन पूरी तरह से खिसक चुकी है। फिर भी कोई भी राष्ट्र भक्त व्यक्ति व दल ऐसा नहीं चाहेगा कि देश के आंतरिक हालात खराब हों पर कांग्रेसियों के बयान से लगता नहीं कि वे देश के साथ खड़े हैं ? या पाकिस्तान के साथ खड़े हैं ?  कुछ भी समझ पाना बड़ा मुश्किल हो रहा है। संभवतः कांग्रेस ही कांग्रेस को समझ सकती है। देशवासी सिर्फ शांति की प्रार्थना करें ताकि निकट भविष्य में शीघ्र सबकुछ अच्छा हो सके। शुभ संकेत यही है कि देश की सेना , सुरक्षा एजेंसी और सरकार सहित विश्व की बड़ी शक्तियां भारत और भारतीयता के साथ हैं।

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