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स्कूल में खाना खाने के बाद बच्चे ही साफ करते हैं बर्तन

शाला प्रबंधन की ओर से पत्रकार को मिल रही धमकियां : छुआछूत जात-पात के भेदभाव को समाज से खत्म करने के लिए जहां शासन स्तर पर तमाम प्रयास किए जा रहे हैं वहीं मध्य प्रदेश के सागर जिले में शिक्षा विभाग के एक शिक्षक मीडिया के कैमरे के सामने छुआछूत की बात शिक्षा के मंदिर में कुछ अलग ही अंदाज में बयां करते नजर आए। 

राय खेड़ा पंचायत की माध्यमिक शाला स्कूल का मामला : गौरतलब है कि शासन प्रशासन द्वारा बेहतर पाठ्यक्रम शिक्षा देने की बात हो रही है। परन्तु इस प्रकार की बेतुकी बयानबाजी कर शिक्षक अपने पद की गरिमा को शर्मसार करते नजर आ रहे हैं।

मामला सागर जिले में देवरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत रायखेड़ा स्थित माध्यमिक शाला स्कूल का है जहां पर स्कूल में अध्ययनरत छोटे-छोटे छात्र-छात्राओं को स्वयं सहायता समूह द्वारा वितरित मिड डे मील के बाद इन्हीं बच्चों से खाने के बर्तन भी धुलवाये जाने का मामला सामने आया।

जब अध्यापक अरविंद राठौर से इस बावत जानना चाहा तो उनका जवाब छुआछूत और जातिवाद की तरफ इशारा करते हुए था। अपनी गलती का अहसास होने पर फिर वह अपनी बात से मुकरते भी नजर आए। शिक्षा विभाग की लापरवाही और विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते क्षेत्र के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों में लापरवाही और मनमानी का आलम चरम पर है।

समय पर स्कूल न पहुंचना और समय से पूर्व ही स्कूलों का बंद हो जाना यदा-कदा देखा जा सकता है। शिक्षक से पहले बच्चे पहुंच जाते हैं और स्कूल में ताला लगा होने के कारण बाहर ही छात्र-छात्राएं घंटों इंतजार करते नजर आते हैं। इतना ही नहीं, शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी कर्मचारियों की राजनीतिक पकड़ मजबूत होने के कारण शासन की स्थानांतरण प्रक्रिया को भी चुनौती दी जा रही है।
 
जब इस मामले को कवरेज करने बुन्देलखण्ड न्यूज की टीम पहुंची शाला प्रबंधन के जिम्मेदारों ने धमकी देने से भी गुरेज नहीं किया। विभाग के अधिकारी और जिम्मेदार गलतियों पर सुधार ना करते हुए उल्टा मामले पर पर्दा डालने की कोशिश करते हुए पत्रकार को अपशब्दों का प्रयोग करते हुए डरा रहे हैं, धमका रहे हैं।

पत्रकारिता की आवाज को दबाया जा रहा है। प्रदेश सरकार के मुखिया कमलनाथ पत्रकारों के हित में नए-नए नियम और कानून लागू कर सुरक्षा प्रदान करने की बात कह रहे हैं तो वहीं प्रदेश में पत्रकारों के साथ लगातार बढ़ती ज्यादतियां रुकने का नाम नहीं ले रहीं।

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