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आरएसएस के अखिल भारतीय योजक वर्ग का समापन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांच दिवसीय अखिल भारतीय योजक वर्ग का समापन हो गया। इसमें देश भर से आए 140 स्वयंसेवकों ने नई ऊर्जा के साथ अपने कार्यक्षेत्रों में काम करने का प्रशिक्षण लिया। स्वयंसेवकों का शारीरिक, बौद्धिक क्षमता, सेवा भक्ति भाव, राष्ट्र भक्ति, समरसता, सर्व समाज को जोड़ने जैसे विषयों पर मार्गदर्शन किया गया।  

योजक वर्ग में पहले दो सत्र हुए जिनमें अलग- अलग टोलियों से नई गतिविधियों के संचालन पर अंतिम रूप दिया गया। समापन सत्र में स्वयंसेवकों में नई ऊर्जा का संचार किया गया। सत्रों में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सर सह कार्यवाह सुरेश सोनी, डॉ. कृष्ण गोपाल, दत्तात्रेय होसबोले, डॉ. मनमोहन वैद्य, मुकुंदन, वी भगैय्या ने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि आज के युग में राष्ट्र और नई व्यवस्था के लिए यह आवश्यक है कि धर्म के सभी प्रकार के सिद्धांतों को अंत:करण में सुव्यवस्थित ढंग से ग्रहण किया जाए। इस आवश्यकता को पूर्ण करने वाला स्वयं स्फूर्त व्यक्ति होता है। वही स्वयंसेवक होता है। ऐसे स्वयंसेवकों की संगठित शक्ति ही इस आवश्यकता को पूर्ण करेगी, ऐसा संघ का विश्वास है। 

मालूम हो कि अंबावाय स्थित एसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित अखिल भारतीय योजक वर्ग में देश भर से 140 योजक (शिक्षार्थी) शामिल होने आए थे। इसके अलावा वर्ग में संघ के राष्ट्रीय, प्रांतीय व क्षेत्रीय पदाधिकारी मौजूद रहे। छह जुलाई को अखिल भारतीय पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक होगी। इसके बाद कुछ पदाधिकारी थिरूकुल एक्सप्रेस और संघ प्रमुख गतिमान एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। कुछ योजक अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हो गए।

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