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व्याप्क भ्रष्टाचार फसल सुरक्षा दीवार के नाम पर लाखो का फर्जीवाडा

पोर्टल मे सैकडो मजदूर कर रहे कार्य स्थल पर एक भी नहीं : जिला ही नही पूरा देष डिजीटल इंडिया की ओर बढ़ रहा है। आज के समय में पारदर्षी सरकार एवं स्वच्छ प्रषासन के लिये एक चुनौती यह भी है की पोर्टल की जानकारी सही हो क्यौकि यह नागरिक पहुच एवं उपयोग के लिये भी की जा रही है। पोर्टल पर मनरेगा,पीएम आवास, स्वच्छभारत मिषन एवं सामाजिक सुरक्षा पेषन के अलावा खेती किसानी से जुड़ी जानकारी, पंचायत को पारदर्षी करने के लिये पंचायत दपर्ण जैसी आनलाइन व्यावस्था के तहत जानकारी अपलोड की गई है। जिसको देखकर आमनागरिक जानकारी का उपयोग कर सके। पोर्टल की जानकारी एवं डिजीटल इंडिया के लिये चुनौती यह है की आमनागरिक जानकारी का उपयोग कैसे करे, कहा से मिले जानकारी, मोवाइल ऐप का उपयोग की जानकारी कहा से मिले इसके लिये डिजीटल साक्षरता की महती आवष्यकता है। स्वयं सेवी संस्था समर्थन ने पन्ना जिले में लगभग 40 गांव में 50-60 सैनिक एवं समितियॉं बनाई है और उनको डिजीटल साक्षरता एवं पोर्टल पर लगातार प्रषिक्षण एवं जानकारी देने का काम किया है। और वे पूरे सैनिक एक दिन में एक साथ किसी भी ग्राम पंचायत का ऑंनलाइन डाटा का सत्यापन करने में सक्षम है। वे लगातार पंचायत दपर्ण एवं मनरेगा से हो रहे काम की निगरानी कर रहे है। इससे लोगो में जानकारी का स्तर भी बढ़ रहा है।

रात्रि चौपाल में पोर्टल का सीधे प्रोजेक्टर के माध्यम से गांव के लोगो को जानारी एवं स्वयं उनके काम एवं गतिविधि को दिखाकर उनसे सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन में मिल रही कमियॉ- आज कई गांव में एक साथ मस्टर पर पोर्टल के अनुसार काम कर रहे मजदूरो को देखा गया कही कही तो एक भी मजदूर काम करते नही पाये गये। जैसे राजापुर में फसलसुरक्षा दीवार दौवनटोला ग्वाल बाबा से खातावरा की ओर 14 लाख से उपर की लागत से बन रही है। उसमें  पोर्टल पर 132 मजदूर लगे थे लेकिन कार्य में एक भी मजदूर नही था। दूसरा ग्राम पंचायत बिलखुरा में दो फसल सुरक्षा दीवालो का काम चल रहा था वहा पर पोर्टल में 112 मजदूर लगे थे लेकिन काम दो तीन महीने पहले ही पूरा हो गया था।  

अबध के खेत से महराज के खेत तक दूसरी नगर की पुलियॉं से विश्राम के खेत तक। दोनो कार्य में एक भी मजदूर नही पाये गये सभी कार्य ठेकेपर पर कराये जा रहे है। मनरेगा में ठेकाप्रथा का कोई नियम नही है उसके बावजूद पंचायतो के जिम्मेवारो द्वारा ठेके पर प्रथा मशीनो से कार्य कराया जा रहा है जबकी ग्रामां के मजदूरो को गांव मे काम नही मिल रहा है। फर्जी वेन्डर बना कर मटेरियल खरीदी के बिल लगाकर राशि आहरित की जाती है जबकी वास्तविक मे कोई कार्य नही होता है यदि जिले की ग्राम पंचायतो का कार्यो का भोतिक संत्यापन पारदर्शिता पूर्वक करा लिया जाये तो करोडो का भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है। मनरेगा में सीसी रोड एवं फसलसुरक्षा के काम पूरी तरह से ठेके पर चल रहे है।

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