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विश्वबैंक बदलेगा निचली गंग नहर की सूरत, बनाए जाएंगे फोरलेन पुल

निचली गंग नहर (हरिद्वार-कानपुर ब्रांच) के विस्तारीकरण को शासन ने मंजूरी दे दी है। विश्वबैंक के सहयोग से 40 करोड़ रुपये की लागत से नहर के चौड़ीकरण का काम जल्द शुरू किया जाएगा। इसके लिए टेंडरिग प्रक्रिया चल रही है। नई परियोजना के तहत नहर की चौड़ाई 15 मीटर तक बढ़ाई जाएगी। कन्नौज जनपद में निचली गंग नहर की कुल लंबाई 58 किलोमीटर है।

विश्वबैंक द्वारा पोषित उत्तर प्रदेश वॉटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिग परियोजना (डब्ल्यूएसआरटी) के अंतर्गत जिले में किलोमीटर 88 (लठोंगर पुल) से किमी. 152 (ऐमा पुल) तक कुल 64 किमी. लंबाई में नहर के चौड़ीकरण का काम पूरा किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी अधीक्षण अभियंता (सिचाई खंड कानपुर) को दी गई है। परियोजना के सहायक अभियंता नितिन पांडेय के मुताबिक जनपद को जितना लक्ष्य दिया गया है, उसमें छह किलोमीटर लंबाई मैनपुरी जनपद के अंतर्गत आती है। पहले नहर की चौड़ाई 30 मीटर थी, अब उसे बढ़ाकर 45 मीटर किया जाएगा, जिससे जल क्षमता में भी वृद्धि होगी। अभी इस नहर की जल क्षमता चार हजार क्यूसेक है जो चौड़ीकरण के बाद 5.5 हजार क्यूसेक तक पहुंच जाएगी। नहर चौड़ी होने से जिले में सिचित क्षेत्र की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।

निचली गंग नहर पर बने पुल कई साल पुराने हैं जो जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। विश्वबैंक द्वारा चौड़ीकरण होने से सभी पुल भी नए सिरे से बनाए जाएंगे। पुलों के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सेतु निगम और लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया गया है। सभी पुल फोरलेन बनाए जाएंगे। आजादी के बाद निचली गंग नहर के लिए सबसे बड़ी विस्तारीकरण परियोजना है।

ब्रिटिश काल में खोदी गई थी नहर

निचली गंग नहर ब्रिटिश शासनकाल में खोदी गई थी। इसे हरिद्वार से कानपुर तक मैदानी इलाके में सिचाई के लिए बनाया गया था। इसकी खोदाई का काम 1872 में शुरू हुआ, जिसे महज छह साल में पूरा कर लिया गया था।

 

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