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सत्संग में रहने से होता है मनुष्य का शरीर व मन पवित्र

सत्संग में जाने से मनुष्य का शरीर पवित्र होता है। साथ ही जिस व्यक्ति पर संत की कृपा होती है। उसे कभी भी निराशा नहीं होती है। यह प्रवचन पं. रमाकांत व्यास ने ग्राम हसनपुर में शीतला माता मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान दिए।

कथा वाचन करते हुए व्यास ने कहा कि प्रथम स्कंध की कथा सुकदेवजी के जन्म राजा पारीक्षत के वंश की माताओं और उनके पितृ पक्ष के राजाओं के चरित्र का वर्णन किया। उन्होने बताया कि पांडवों के स्वर्गारोहण के बाद पारीक्षत हस्तिनापुर के राजा बने थे।

साथ ही उन्होने धर्म की पुर्नस्थापना की थी। राजा पारीक्षत श्रृंगी ऋषि के श्राप से शापित होकर अपना राजपाठ अपने पुत्र जनमेजय को देकर मोक्ष प्राप्त करने के लिए गंगा के किनारे जाकर रहने लगे। वहां पर उनको सुखदेव महाराज ने दर्शन दिए थे वहां पर सुखदेव महाराज ने उनको भागवत कथा सुनाई राजा पारीक्षत सात दिन तक बराबर कथा सुनते रहें।

और भगवान में ऐसा मन लगाया कि किसी बात की सुधि ना रही और सातवें दिन तक्षक सर्प ने आकर उनको डंस लिया। और राजा परमधाम को प्राप्त हुए। अंत में पंडित ने कथा सुनाते हुए कहा कि सत्य है कि भगवान का चरित्र भक्तिपूर्वक सुनने से धर्म अर्थ काम मोक्ष चारों पदार्थ अनायास ही मिल जाते हैं। भागवत सुनने के लिए भारी संख्या में भक्तजन मौजूद रहे। अंत में पारीक्षत् मिथिला लक्ष्मीनारायण पटैल ने आरती उतारकर प्रसाद वितरण किया।

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