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नदी-नालों की हिलोरें पड़ गई सुस्त, गहराया भीषण जलसंकट

अंचल में भीषण गर्मी के कहर से जनजीवन अस्तव्यस्त है। गर्मी की विकरालता का असर न सिर्फ जनजीवन पर पड़ रहा है बल्कि नदियों और तालाबों के साथ ही अन्य जलाशयों पर भी पड़ रहा है। अंचल से गुजरी गिनी-चुनी नदियों और तालाबों की तलहटी में पानी दिखने लगा है। पारा 44 के समीप पहुंचने के चलते पशु पक्षी भी प्यास से जूझने लगे हैं, क्योंकि छोटी नदियों में महज कुछ स्थानों पर एकत्रित पानी ही दिख रहा है।

छतरपुर जिले में जल स्तर बढ़ाने के लिए धसान, केन, काठन प्रमुख नदियां हैं जिनमें पानी तो रहता है, लेकिन गर्मी के पहले ही इन नदियों से रेत की बेतहाशा अवैध निकासी ने इन नदियों की दिशा और दशा मोड़कर रख दी है। इन तीन बड़ी नदियों के अलावा लगभग आधा दर्जन छोटी नदियां हैं जो बरसात के बाद सर्दियां जाते-जाते अपनी धार तोड़ देती हैं।

इसकी वजह यह है कि इन छोटी नदियों का पानी संरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से जल संरक्षण के अपेक्षित उपाय न होने के कारण पांच वर्षों से जलसंकट में और अधिक इजाफा हुआ है। गांवों में पानी का विकराल संकट उत्पन्न हो रहा है तो वहीं शहरी इलाकों में भी पेयजल किल्लत बढ़ी हुई है।

इतना ही नहीं गांवों में आमलोगों के अलावा मूक मवेशियों को उनका गला तर करने के लिए समस्या खड़ी हो गई है। छतरपुर जिले का दुर्भाग्य कहें कि यहां नदियों, नालों और बांधों का संरक्षण करने के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं किए जा रहे हैं।

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