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टैगोर के रवीन्द्र संगीत, साहित्य एवं चित्रकला पर व्यापक चर्चा

रवीन्द्रनाथ टेगौर जयन्ती पर लेखक संघ द्वारा परिचर्चा आयोजित

लेखक संघ की सागर इकाई द्वारा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टेगौर जयन्ती पर मंगलवार शाम को परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ राष्ट्रगीत-जन गण मन के सामूहिक गायन से हुआ।लेखक संघ के पोद्दार कालोनी स्थित कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कथाकार डाॅ. आशुतोष मिश्र ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टेगौर सही अर्थों में सम्पूर्ण भारतीय सांस्कृतिक गरिमा और मनुष्यता के प्रतीक थे। इनका समग्र रचनाकार्य विश्व-बिरादरी को भारतीयता की अनुपम देन है। टेगौर की रचनात्मकता बहु स्तरीय और बहु विधात्मक थी इसमें वे अपनी सीमा को भी सामथ्र्य में परिवर्तित कर लेते थे जैसे स्वयं गुरुदेव ने स्वीकार किया है कि वे अपने चित्रों में व्यक्तियों के पैर जैसा वे चाहते थे वैसा नहीं बना पाते थे। इसके लिए उन्होंने चित्रकला में प्रापर्टी का इस्तेमाल करना प्रारम्भ किया जो बाद के दिनों में चित्रकला के क्षेत्र में एक नयी पहल मानी गयी। श्री अक्षय अनुग्रह ने टेगौर जी के बांग्ला गीतों और उनके हिन्दी अनुवादों पर डाॅ. मिश्र से व्यापक विचार विमर्श किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रुतिमुद्रा सांस्कृतिक समिति के सचिव एवं आदर्श संगीत महाविद्यालय के अध्यक्ष श्री मुन्ना शुक्ला ने टैगोर जी के रवीन्द्र संगीत के बारे में विस्तार से बताया। लेखक संघ के सचिव डाॅ. अशोककुमार तिवारी ने साहित्य के नोबल पुरस्कार से सम्मानित रवीन्द्रनाथ टेगौर के जीवन संघर्ष एवं कहानी-उपन्यास की रचना धर्मिता से उपस्थित जनों को अवगत कराया। डाॅ. कविता शुक्ला ने टेगौर लिखित बांग्ला गीत का गायन किया, श्रीमती आज्ञा तिवारी ने रवीन्द्रनाथ टेगौर लिखित कविता का हिन्दी अनुवाद पढ़कर सुनाया।

द्वितीय चरण में लेखक संघ के अध्यक्ष श्री वृन्दावन राज ‘सरल’ के संचालन में काव्य गोष्ठी आयोजित की गयी जिसमें श्री टीकाराम त्रिपाठी, श्री पी.आर. मलैया, श्री वृन्दावन राज ‘सरल’, श्री आर.के. तिवारी, श्री मुकेश तिवारी, श्री आदर्श दुबे, श्री प्रभातकुमार कटारे, श्री पुष्पेन्द्र दुबे, डाॅ. सतीश पाण्डे और श्री एम.डी. त्रिपाठी ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर डाॅ. श्रीमती चंचला दवे, श्री मोहनलाल विश्वकर्मा और श्री आनन्द मिश्र उपस्थित थे।

 

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