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यहां मिलते हैं संस्कार, स्वच्छता की शिक्षा

यूं तो हर स्कू ल में बच्चों को शिक्षा दी जाती है, लेकिन जब बात सरकारी स्कूलों की आती है तो वही पुराना ढर्रा और तमाम अव्यवस्थाएं जेहन में आने लगती हैं। ऐसे हालातों में एक सरकारी स्कू ल जब संस्कारों के साथ स्वच्छता के लिए अव्वल नजर आए तो बात कु छ अचरज भरी लगती है।यहां बात हो रही है बड़ामलहरा अनुविभाग के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सेवार के मजरा गुलाई के टपरियन खेरा स्कू ल की। जो अन्य सरकारी स्कूलों से स्वच्छता और बेहतर शैक्षणिक व्यवस्थाओं में अव्वल नजर आता है। सागर-टीकमगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस प्राइमरी शाला में सुंदर फू लों की क्यारियां बनी हुई हैं। सलीके से की गई बागवानी बच्चों के मन को सुकू न देती है तो मनमोहक फू ल भी खुशबू देकर बच्चों को आनंदित कर देते हैं। शिक्षा के इस मंदिर में टपरियनखेरा ही नहीं बल्कि आसपास के आधा दर्जन गांवों के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।

प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक बच्चों को कि ताबी ज्ञान के अलावा खेलकूद और बागवानी की शिक्षा दे रहे हैं। शिक्षा के लिए बनाए गए बेहतर माहौल का नतीजा है कि यहां बच्चों की शिक्षा के अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।प्राइमरी शाला टपरियनखेरा का निर्मित भवन 240 वर्गमीटर का है और 1226 वर्गमीटर का खुला एरिया मौजूद है। विद्यालय के आसपास की भूमि खसरा नंबर 751/2, 751/3 के अंशभाग पर कु छ ग्रामीणों द्वारा अतिक्रमण किया गया है। प्राइमरी शाला को शिक्षा का मंदिर बनाने में जुटे शिक्षक अशोक अवस्थी बताते हैं कि संस्था की स्थापना 08 जनवरी 2014 को हुई थी तभी से विद्यालय को सुंदर बनाने के प्रयास शुरु कर दिए गए थे।

श्री अवस्थी कहते हैं कि स्कू ल में पानी की समस्या नही होती तो आज अनेक प्रकार की औषधि के पौधे भी विद्यालय परिसर में मौजूद होते।प्राईमरी शाला के प्रधान अध्यापक रमेश यादव कहते हैं कि संस्था में फिलहाल 26 बच्चे हैं। अन्य बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में पढ़ने आने वाले बच्चों को यहां बेहतर पढ़ाई का माहौल दिया जा रहा है। सभी पदस्थ शिक्षक स्कू ल खुलने से आधा घंटा पहले आते हैं। इतना ही नहीं रसोइया भी समय से मौजूद रहती है। जिनकी मौजूदगी में बच्चों को बागवानी की नियमित क्लास दी जाती है। ऐसे में बच्चे पौधों की सुरक्षा और महत्व को भी समझ रहे हैं।हमारा प्रयास है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर माहौल मिले ताकि उन्हें यह फर्क महसूस ही न हो कि प्राइवेट स्कू ल सरकारी स्कूलों से बेहतर होते हैं इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को बागवानी और खेलकूद की शिक्षा दी जा रही है। हमारा संकल्प है कि यह विद्यालय अन्य सरकारी स्कूलों की तरह दुर्दशा का शिकार न रहे।

 

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