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विन स्प्रिट ही जिंदगी में जीत दिलाती है

मेरे घर के सामने एक छोटा सा मैदान है। खाली मैदान देखकर बच्चे क्रिकेट खेलने आ जाते हैं। मेरा भतीजा भी उन बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहा था। इधर पिताजी ने आवाज दिया तो मैंने उसे आवाज दी कि आ जाओ काम है कुछ ? भतीजे ने उधर से कहा कि रूको ! मैंने कहा अरे ? लगभग डांटते हुए अंदाज में बोला कि अंदर आओ। चूंकि बड़ों की आज्ञा का पालन ना करना भी अपराध है। मुझे आज्ञाकारी पुत्र की बात याद आ गई। मैं कहने लगा कि देखो ये बालक आज्ञाकारी नहीं है। 

उसने कहा कि एक ओवर खेल लूं। मैं जीतने की कगार पर हूँ। मैं समझ चुका था कि ये विन करने की स्प्रिट है। अक्सर इंसान मंजिल पर पहुंचने के समय पर ही ठहर जाता है और हार जाता है। जबकि प्रयास तब तक होना चाहिए जब तक जीत ना जाए। खैर क्रिकेट में एक बाॅल में क्लीन बोल्ड हो जाना होता है। किन्तु जीतने का प्रयास करने की भावना राहुल द्रविड़ , गौतम गंभीर और युवराज सिंह जैसे क्रिकेट को जन्म देती है। क्रिकेट मे ही देखने को मिलता है कि एक टीम हारने के उपरांत पिच खराब होने से लेकर बैट्समैन एवं बाॅलर के अंदर की तमाम कमियां गिनाती हैं। जैसे कि कैप्टन कहता है कि बाॅल आवश्यकता से अधिक बाउंस हो रही थी , अचानक से बाॅल एकदम सीधी सपाट जा रही थी। यही कारण रहा कि बैट्समैन बाॅल को पढ़ने में नाकाम सिद्ध हो रहे थे। उनके बाॅलर्स को खूब मदद मिल रही थी। ऐसे ही कुछ कारण पिच में थे कि हमें हार नसीब हुई। 

राजनीति की पिच पर भी यही हाल हैं। लोग दूर - दराज से राजनीतिक पारी खेलने के लिए आते हैं। ये राजनीतिक लोग भी क्रिकेट के बैट्समैन और बालर की तरह बड़े दिमागदार होते हैं। परंतु अपनी हार के साथ व्यक्तिगत कमी ना गिनाकर कमंट्रेटर पर ठीकरा फोड़ देते हैं कि कमेंट्री भी एक बड़ी वजह थी कि हमारे बैट्समैन और बाॅलर को डिस्टर्ब किया गया। उन्होंने कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं कि ध्यान भंग हुआ। 

सबसे बड़ी बात कि लोकतंत्र में चुनावी हार - जीत के लिए पहले टिकट की दरकार होती है। यदि टिकट ही नहीं मिला और निर्दलीय लड़ने लायक प्रतापगढ़ के राजा भैया जैसी लोकप्रियता नहीं है तो कुछ लोगों का राजनीतिक कैरियर खत्म नजर आने लगता है। किन्तु ऐठन है कि जाती नहीं। हकीकत में क्रिकेट की पिच और प्रतिद्वंद्वी बाॅलर को पहचानने में गलती करते हैं और हार नसीब होने के पश्चात सोशल वलगर फैलाते हैं। एक बालक हार जाता है तो वह हताश होकर वायस पल्यूशन फैलाता है और दूसरा बालक जीतकर भी शांत रहता है। हारे हुए बालक और जीतने वाले बालक के बीच यही अंतर है। इतना सा अंतर हार - जीत का परिणाम देता है। 

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