?> एक-एक सांस का मूल्य समझो: मां कनकेष्वरी देवी बुन्देलखण्ड का No.1 न्यूज़ चैनल । बुन्देलखण्ड न्यूज़ परम पूज्य मां कनकेष्वरी देवी ने कहा कि जीवन में सत्सं"/>

एक-एक सांस का मूल्य समझो: मां कनकेष्वरी देवी

परम पूज्य मां कनकेष्वरी देवी ने कहा कि जीवन में सत्संग की महिमा का जानो और सत्संग करो। सत्संग मानव जीवन की आवष्यकता नहीं अनिवार्यता है। सत्संग से ही जीवन में सुधार होता है। जीवन में एक-एक सांस का मूल्य समझो और उसे निरर्थक नहीं जाने दो। सत्संग से ही जागृति होती है। जागृत व्यक्ति कभी भी अपनी सांसों को बर्वाद नहीं करता। प्राणायाम करके सांसों की लंबाई तो बढ़ सकती है पर ऐसी सांसें क्या काम की जिनमें हरिनाम के मोती नहीं पिरोये गए हों।

मां कनकेष्वरी देवी ने यह अमृत वचन गृह व परिवहनमंत्री भूपेंद्र सिंह द्वारा बांदरी के पुलिस थाना मैदान में आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा में व्यक्त किए। कथा में आज भी गृह व परिवहनमंत्री  भूपेंद्र सिंह सपत्नीक उपस्थित रहे। कथा में आज हरिद्वार की मानस विदुषी मां सविता देवी  ने भी उपस्थित होकर कथा का श्रवण किया।

अंत समय में बहुत पीड़ा होगी: मां कनकेष्वरी देवी  ने कहा कि यदि वन मेें सत्संग नहीं किया तो तुम्हें अंत समय में बहुत ही पीड़ा होगी। समय रहते सत्संग करो और परोपकार भी करो। इसके लिए जरूरी नहीं की तुम बड़े भंडारे ही कराओ। चींटी को आटा डालकर भी तुम  परोपकार का काम कर सकते हो। यदि हम समय रहते नहीं जगे तो फिर भरोसा नहीं की तुम किस दल-दल में पड़ जाओ। इस बार तो मानव तन मिल गया पर अब गारंटी नहीं की तुम्हें मानव देह मिल ही जाए।

अंत गति स्मृति के अनुसार : मां कनकेष्वरी देवी  ने कहा कि माया के फेर में इंसान भटक रहा है। धन-दौलत की चाह ने उसके भविष्य पर प्रष्नचिन्ह लगा दिए हैं। इंसान की मृत्यु के समय जैसी स्मृति होती है उसे उसी के अनुसार देह मिल जाती है।  मां कनकेष्वरी देवी  ने कहा कि जीवन रूपी गड्ढे से निकलने का प्रयास तुम्हें ही करना होगा। इसके लिए हाथ उठाना होगा। यदि तुम निकलने के लिए हाथ नहीं उठाओगे तो दल-दल रूपी गड्ढे से निकलने में अक्षम हो जाओगे।

भजन में एकाग्रता नहीं: मां कनकेष्वरी देवी  ने कहा कि आज इंसान भक्ति तो करता है पर सच्चे मन से नहीं । तुम भजन करते भी तो एकाग्रता से नहीं करते।तुम भजन भगवान के लिए नहीं अपने लिए करते हो। भक्ति - भजन करने से अपनी आत्मा को विकास हो जाता है। हमें नीति के रास्ते पर चलकर ही सच्चे सुख की प्राप्ति हो सकती है। अनीति का मार्ग पतन का मार्ग है। अनीति पर चलने वाला कितना भी बड़ा बन जाए पर सुखी नहीं हो सकता। देखने में आता है कि ज्यादातर बड़े घरों के लोग ही आत्महत्याएं करते हैं। हत्याएं भी करोड़पतियों के यहां होती हैं जबकि झोपड़ियों में रहने वाले लोग ज्यादा आनंद से रहते हैं।

हर योग वियोग के लिए : मां कनकेष्वरी देवी  ने कहा कि हर योग वियोग के लिए बना है। सो अभी से हमें सरकने की आदत डालना चाहिए। संसार को मृत्युलोक कहा जाता है। जन्म लोक नहीं। आपके जन्म से ही मृत्यु की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। रोना है तो भगवान के लिए रो। मीरा जी के पास क्या कमी थी। दास-दासी और महल थे। पर उनके जीवन के आधार तो गिरधर ही थे। मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई...। सुबह-षाम हरिनाम जीवन में शामिल होना चाहिए। 

कथा का श्रवण करने मुख्य यजमान गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह, भाजपा मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज सिंह, मंत्री प्रतिनिधि  लखन सिंह ,सरपंच संध के जिलाध्यक्ष सतेंद्र सिंह, जिलापंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अषोक सिंह बामोरा, म.प्र. तुलसी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पं.महेषदत्त त्रिपाठी समेत मालथौन, रजवांस, बरौदियाकलां, बांदरी के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व धर्मप्रेमी मौजूद थे। कथा के बाद मुख्य यजमान  गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह, भाजपा मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज सिंह ने श्रीमद्भागवत की आरती की।



चर्चित खबरें